मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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इंसान का असली स्वभाव मुश्किल समय में ही सामने आता है और इसका एक खास कारण है, जब इंसान मुश्किलों, दबावों या संकटों का सामना करता है तो उसकी भावनाएँ, सोच, और रियेक्ट करने के तरीके अधिक प्रकट होते हैं। इस समय, व्यक्ति अपनी असल प्रकृति को बिना किसी झिझक के व्यक्त करता है क्योंकि तनाव और दबाव की स्थिति में आदतें और आंतरिक प्रवृत्तियाँ सामने आती हैं। अक्सर हर इंसान का स्वभाव लालची होता है और जो इंसान इस लालच से उबर जाते हैं, वे अपना जीवन सुखमय बिताते हैं । कुछ लोग वर्तमान में जीते हैं, वे कल की चिंता नहीं करते हैं । अधिकतर लोग ऐसे भी हैं जो कल की नहीं, बल्कि दस बीस साल बाद की चिंता में डूबे रहते हैं । वे यह नहीं सोचते कि कल मैं जिंदा रहूंगा या नहीं, लेकिन चिंता उन्हें अनागत भविष्य की खाए जाती है ।
लालची और लोभी व्यक्ति अपने कपट-व्यवहार को कितना ही छिपाये देर-सबेर प्रकट हो ही जाता है। आज का मानव बहुरूपिया बन गया है, उसका स्वभाव जटिलताओं का केंद्र बन गया है। हर किसी के साथ और हर स्थान पर लोभ और लालच से पेश आता है। महात्मा बुद्ध ने ठीक ही कहा है कि जो पल वर्तमान में आप जी रहे हैं, वही आपका है । जो समय बीत गया, वह भूत हो गया और जो आने वाला है, उस पर आपका वश नहीं है, फिर भविष्य की चिंता क्यों ? इसलिए स्वस्थ रहें, मस्त रहें, हंसते और हंसाते रहें, कभी अपने लिए, कभी अपनों के लिए
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

