Thursday, February 26, 2026
Homeदेशसंतोषगढ़ रविदास मंदिर के संघर्ष की कहानी

संतोषगढ़ रविदास मंदिर के संघर्ष की कहानी

मूकनायक/ देश

राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा


22 जनवरी की सत्यता।

ऊना जिले के संतोषगढ़ रविदास मंदिर के संघर्ष की कहानी जो भीमा कोरेगांव संघर्ष की कहानी से कम नजर नहीं आती।

दोस्तों दलितों की बहादुरी के किस्से सुनते रहते हैं। एक किस्सा हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के संतोषगढ़ रविदास मंदिर के संघर्ष की कहानी है।
इस श्री गुरु रविदास मंदिर को मनुवादियों की मिलीभगत से और दूसरे गलत तरीकों को अपनाकर 22 जनवरी 2005 को रात के समय जब लोग सोए हुए थे पुलिस की मिलीभगत से तोड़ दिया था। और लोगों पर जुल्म ढाए। महिलाओं को लात घूंसे मारे थे और बेइज्जत भी किया था ।और गर्भवती महिलाओं को भी नहीं बख्शा था। इस संघर्ष में एक या दो लोग भी मारे गए। 66 आदमियों और करीब 24 महिलाओं को जेल भेज दिया था। लोगों पर क्रिमिनल मुकदमे दायर किए गए थे।
लेकिन वहां के लोगों ने हिम्मत नहीं हारी लगातार के संघर्ष के बाद जीत हासिल की ।और तारीख 22 जनवरी 2019 थी ।जब रविदास मंदिर महा के लोगों की लगन और मेहनत से बनकर तैयार हुआ था ।और आज एक भव्य आलीशान मंदिर तैयार है। उस रविदास मंदिर में एक श्री रविदास जी की मूर्ति ।एक बाबा साहेब की मूर्ति। और एक भगवान बुद्ध की मूर्ति स्थापित की गई है।
श्री गुरु रविदास मंदिर की शोभा बढ़ रही है ।रविदास जी का मंदिर पांच मंजिला बनकर तैयार हो गया है।
22 जनवरी 2019 को जीत हासिल की थी ।इस खुशी में वहां रविदास जी की शोभायात्रा निकाली जाती है। क्योंकि 22 जनवरी 2005 को रविदास जी के मंदिर को तोड़ा गया था ।तभी से आज तक वहां श्री गुरु रविदास जी की शोभायात्रा 22 जनवरी को बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। संतोषगढ़ के लोग बधाई के पात्र हैं। उनके साहस की हम भूरी भूरी प्रशंसा करते हैं।
22 जनवरी को कभी नहीं बुलाया जा सकता। इस दिन बहादुर दलितों ने विजय हासिल की थी। और बहादुर दलितों ने दिखा दिया था कि हम किसी से कम नहीं है।

मोतीराम MA
पूर्व अधिकारी
SHAHDARA

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments