घर के सदस्यों में एक-दूसरे के प्रति अगर ईर्ष्या आ जाए तो फिर घर में पूजा कराओ या हवन, घर का टूटना है तय
मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍🏻✍🏻
बाहर के दुःखों से मनुष्य लड़ लेता है लेकिन भीतर के क्लेशों का सामना करना उसके लिए सबसे कठिन हो जाता है। अब क्लेश की बात चाहे उसके स्वयं के भीतर की हो या घर के भीतर की, दोनों ही क्लेश एक मनुष्य को तोड़ने के लिए किसी शस्त्र के समान हैं।
भीतर का युद्ध जीतना इसलिए भी अति कठिन हो जाता है क्योंकि मनुष्य सबको समझा लेता है लेकिन क्लेश स्वयं के भीतर हो या घर के भीतर, दोनों को समझाना आसान नहीं हो पाता। याद रखना घर के सदस्यों में एक-दूसरे के प्रति अगर ईर्ष्या आ गई तो फिर घर में पूजा कराओ या हवन, घर का टूटना तय है…
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

