भव्य धम्म यात्रा निकाली गई, करुणाशांति बुद्ध विहार और लार्ड बुद्ध विहार में खीरदान कार्यक्रम आयोजित
मूकनायक समाचार । सूरत
अशोक विजयादशमी के पावन अवसर पर 70वें धम्मचक्र प्रवर्तन महोत्सव के उपलक्ष्य में अमरोली में भारतीय बौद्ध महासभा, भारतीय बौद्ध समाज विकास परिषद, समता सेवा फेडरेशन तथा समस्त आंबेडकर बौद्ध समाज, सूरत शहर के तत्वावधान में भव्य धम्म यात्रा निकाली गई। बौद्ध समाज के प्रमुख नेता दिलीप के. सिरसाठ के नेतृत्व में आयोजित इस यात्रा में बड़ी संख्या में बौद्ध समाज के अनुयायियों, उपासकों और उपासिकाओं ने भाग लिया।
धम्म यात्रा का शुभारंभ बौद्ध समाज के वरिष्ठ नेताओं, उतराण के पूर्व सरपंच आप्पासाहेब काशीनाथ सिरसाठ, आर.के. सोनवणे, बौद्ध समाज के अग्रणी नागमल प्रभाकर तथा समता सेवा फेडरेशन की गुजरात प्रदेश अध्यक्ष आशाताई मंगले ने पंचशील ध्वज फहराकर किया। यात्रा अमरोली चार रास्ता से प्रारंभ होकर मानसरोवर, भगुनगर और अमरोली पुलिस स्टेशन होते हुए कोसाड आवास स्थित करुणाशांति बुद्ध विहार पहुंची, जहां इसका समापन हुआ।
धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश
करुणाशांति बुद्ध विहार में धम्म वंदना और खीरदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने अशोक विजयादशमी और धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस के ऐतिहासिक, सामाजिक तथा धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने बताया कि सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद हिंसा का मार्ग त्यागकर बौद्ध धम्म को अपनाया और शांति, करुणा तथा मानवता का संदेश दिया। इसी प्रकार भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने विभिन्न धर्मों का गहन अध्ययन करने के बाद 14 अक्टूबर 1956 को अशोक विजयादशमी के अवसर पर नागपुर की दीक्षाभूमि में अपने लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धम्म की दीक्षा ग्रहण की थी।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता से पीड़ित समाज को आत्मसम्मान, समानता और मानवता के आधार पर जीवन जीने का मार्ग दिखाया। बौद्ध धम्म के सिद्धांतों ने समाज को स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और करुणा का संदेश दिया। इसी ऐतिहासिक दिवस की स्मृति में देशभर के बौद्ध अनुयायी दीक्षाभूमि नागपुर पहुंचकर बाबासाहेब को नमन करते हैं और उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लेते हैं।
आशाताई मंगले की अध्यक्षता में हुआ कार्यक्रम
करुणाशांति बुद्ध विहार तथा लार्ड बुद्ध विहार में आयोजित खीरदान कार्यक्रम की अध्यक्षता समता सेवा फेडरेशन की गुजरात प्रदेश अध्यक्ष एवं रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) की सूरत शहर-जिला महिला अध्यक्ष आशाताई मंगले ने की। मुख्य अतिथि के रूप में समता सेवा फेडरेशन के गुजरात प्रदेश महासचिव एवं रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के गुजरात प्रदेश महासचिव सुभाषभाई झाडे उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में लोकशक्ति पार्टी के गुजरात प्रदेश उपाध्यक्ष नागमल प्रभाकर, बौद्ध समाज के युवा नेता जितेशभाई शेषराव सुरवाडे, भारतीय बौद्ध समाज विकास परिषद के सूरत शहर अध्यक्ष प्रफुल्ल एस. जगदेव सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आयोजन में इनकी रही सक्रिय भागीदारी
महोत्सव के आयोजन में गौतम इंगले, शशिकांत कापुरे, अशोक महिरागीर, संजय मोरे, शरदभाई सामुदे, मनोहर आहिरे, अनिल पानपाटिल, दिनेशभाई गौतम, रामजीत बोरिचा, उद्धव पी. बागले, मनोहर ठिवरे, सुखदेव वानखड़े, कैलाश धोड़े, सुरेश आखाडे, आनंद वाघ, संजय पवार, अंबालाल सोनवणे, योगेंद्रभाई भारती, राजूभाई शिंगारे और आकाश नगराले सहित आयोजन समिति के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
महिला वर्ग से संध्याबेन संतोष भगत, समता महिला मंडल की अध्यक्ष शीतलबेन सोनवणे, उपाध्यक्ष आशाबेन जे. पवार, विश्व शांतिदूत महाबोधि बुद्ध विहार उपासिका संघ की अग्रणी विमलबेन गवई, अलकाबेन जगदेव, हिरूबेन आखाडे, विमलबेन रामदास सोनवणे तथा समता महिला मंडल की महासचिव संगीता सिरसाठ सहित अनेक महिला कार्यकर्ताओं ने सहभागिता निभाई।
विभिन्न बुद्ध विहारों के अनुयायियों ने लिया भाग
धम्म यात्रा और खीरदान कार्यक्रम में सिद्धार्थ बुद्ध विहार, पंचशील बुद्ध विहार, लार्ड बुद्ध विहार, करुणाशांति बुद्ध विहार, त्रिरत्नदीप बुद्ध विहार तथा धम्मदीप बुद्ध विहार के उपासक-उपासिकाएं बड़ी संख्या में शामिल हुए।
पूरे आयोजन के दौरान ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’, ‘बुद्ध धम्म की क्या पहचान—मानव-मानव एक समान’, ‘जय भीम’, ‘नमो बुद्धाय’ और ‘जय संविधान’ के नारों से वातावरण गूंज उठा। कार्यक्रम का समापन सामाजिक एकता, समानता, बंधुत्व और भगवान बुद्ध के शांति एवं करुणा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प के साथ हुआ।

