Wednesday, July 29, 2026
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सामाजिक यथार्थ की सशक्त अभिव्यक्ति है लघुकथा : डॉ. अशोक भाटिया

मूकनायक/सरिता रानी
पानीपत/हरियाणा

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में आयोजित ‘पुस्तक पर चर्चा’ कार्यक्रम में वरिष्ठ लघुकथाकार डॉ. अशोक भाटिया ने कहा कि लघुकथा सामाजिक यथार्थ का सशक्त प्रतिनिधित्व करने वाली तथ्यप्रधान साहित्यिक विधा है। यह बदलते सामाजिक परिवेश को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करती है तथा आज साहित्य की एक स्थापित विधा बन चुकी है।
उन्होंने ‘हिन्दी लघुकथा संचयन’ पर चर्चा करते हुए बताया कि साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में देश के 98 साहित्यकारों की प्रतिनिधि लघुकथाओं का संकलन किया गया है। विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि लघुकथा का भविष्य उज्ज्वल है, क्योंकि इसमें संवेदना और तथ्यपरकता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने लघुकथा की तुलना खेत की छोटी क्यारी से करते हुए कहा कि आकार में छोटी होने के बावजूद इसका प्रभाव अत्यंत गहरा होता है। इस अवसर पर उन्होंने ‘आलोचना’, ‘वागर्थ’, ‘हंस’, ‘कथादेश’, ‘व्यंग्य यात्रा’ और ‘नई धारा’ जैसी प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं पर भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया ने कहा कि हिन्दी विभाग में साहित्यिक गतिविधियों को नई गति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि लघुकथा संवेदनशील अभिव्यक्ति का ऐसा माध्यम है, जो कम शब्दों में गहरा प्रभाव छोड़ती है। साहित्य और संवेदना का संबंध अटूट है तथा लघुकथा समय की कसौटी पर खरी उतरने वाली समकालीन विधा है।
विशिष्ट अतिथि इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. धर्मवीर ने कहा कि भविष्य में इतिहास एवं हिन्दी विभाग संयुक्त रूप से साहित्यिक और ऐतिहासिक विषयों पर कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया ने मुख्य अतिथि डॉ. अशोक भाटिया एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. धर्मवीर का अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम में शोधार्थी नरेश, सौरभ, योगेश एवं शिवम सहित अनेक विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। संचालन शोधार्थी योगेश कुमार ने किया, जबकि अंत में डॉ. जसबीर सिंह ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर प्रो. महासिंह पूनिया ने घोषणा की कि हिन्दी विभाग की वर्षों से बंद पड़ी ‘संभावना’ शोध पत्रिका का पुनः प्रकाशन शीघ्र शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने इसके पुनर्प्रकाशन को स्वीकृति प्रदान कर दी है। साथ ही उन्होंने बताया कि हिन्दी विभाग में शीघ्र ही प्रख्यात आलोचक डॉ. नामवर सिंह की जयंती भी आयोजित की जाएगी।

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