Saturday, July 25, 2026
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इंसान की नीयत और मौसम की फितरत, दोनों ही परिवर्तनशील हैं और इन पर भरोसा करना है मूर्खता

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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परिवर्तन संसार का नियम है, लेकिन जब यह परिवर्तन इंसान की नीयत और मौसम के मिजाज में दिखने लगे, तो वह अस्थिरता का सबसे बड़ा उदाहरण बन जाता है। किसी कवि ने ठीक ही कहा है कि इंसान की नीयत और मौसम की फितरत का कोई भरोसा नहीं होता। इन दोनों पर अत्यधिक विश्वास करना अक्सर केवल धोखा और निराशा ही झोली में डालता है। स्वार्थ और परिस्थितियों का खेल मौसम से भी अधिक खतरनाक और अप्रत्याशित होती है इंसान की नीयत। जब तक इंसान का स्वार्थ सिद्ध होता है, उसका व्यवहार शहद की तरह मीठा और मददगार रहता है, लेकिन जैसे ही परिस्थितियां बदलती हैं या स्वार्थ आड़े आता है, उसकी नीयत बदलते देर नहीं लगती। आज का परम मित्र कल का सबसे बड़ा शत्रु बन सकता है। इंसान के मन के भीतर क्या चल रहा है, इसे भांपना दुनिया का सबसे कठिन काम है।
अंधविश्वास की मूर्खता के चलते जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे मौसम के भरोसे खुले आसमान के नीचे अपनी पूरी पूंजी छोड़ देता है, वह भारी नुकसान उठाता है। ठीक उसी तरह, जो इंसान किसी के बाहरी दिखावे और मीठी बातों पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेता है, वह जीवन में गहरा धोखा खाता है। इन दोनों की परिवर्तनशीलता को नजरअंदाज करना और इन पर अंधविश्वास करना वैचारिक मूर्खता है, क्योंकि इनका आधार कभी भी स्थायी नहीं होता। सच्चाई यही है कि बदलते मौसम से बचने के लिए हमें हमेशा छाता (पूर्व तैयारी) साथ रखना चाहिए, और बदलते इंसानों से बचने के लिए अपने विवेक और सतर्कता का कवच पहनकर रखना चाहिए। समझदारी इसी में है कि हम इन दोनों के परिवर्तनशील स्वभाव को स्वीकार करें, सचेत रहें और किसी पर भी अंधा भरोसा करने की भूल ना करें।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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