Tuesday, September 29, 2026
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रेत संकट से ठप विकास कार्य, सरपंचों ने दिया सात दिन का अल्टीमेटम

रेत उपलब्ध नहीं हुई तो पंचायतों में होगी तालाबंदी, जनसुनवाई में सौंपा ज्ञापन

मूकनायक समाचार | सत्यशील गोंडाने
बालाघाट

बालाघाट जिले में रेत की उपलब्धता को लेकर लंबे समय से बनी हुई समस्या अब गंभीर रूप लेती जा रही है। जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने एकजुट होकर प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। पंचायत प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि में रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं की गई तो जिलेभर की पंचायतों में तालाबंदी कर सामूहिक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में बड़ी संख्या में सरपंच एवं पंचायत प्रतिनिधि कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बताया कि रेत के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना, सीसी सड़क, नाली, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन तथा अन्य निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है।

विकास योजनाओं पर पड़ा सीधा असर

पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि शासन द्वारा ग्रामीण विकास के लिए पर्याप्त राशि स्वीकृत की जाती है, लेकिन निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक रेत उपलब्ध नहीं होने के कारण अधिकांश परियोजनाएं अधर में लटक गई हैं। पंचायतों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए जाते हैं, परंतु संसाधनों की कमी के चलते लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अनेक हितग्राहियों को किस्तें मिलने के बावजूद मकानों का निर्माण आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसी प्रकार सड़क, पुलिया और नाली निर्माण कार्य भी प्रभावित हैं। कई स्थानों पर अन्य निर्माण सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद केवल रेत के अभाव में कार्य बंद पड़े हैं।

प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध जिला, फिर भी रेत की कमी

ज्ञापन में सरपंचों ने सवाल उठाया कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध बालाघाट जिले में रेत संकट क्यों बना हुआ है। जिले में अनेक नदियां और रेत घाट होने के बावजूद पंचायतों को वैध रूप से रेत उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि लंबे समय से प्रशासन का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित कराया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी और स्थायी समाधान सामने नहीं आया है। इससे जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच जवाब देना कठिन हो रहा है और विकास कार्यों की गति लगातार प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों में बढ़ रहा असंतोष

रेत संकट का असर सीधे ग्रामीणों पर भी दिखाई दे रहा है। जिन परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए था, वे अधूरे निर्माण कार्यों के कारण परेशान हैं। कई हितग्राही अपने मकान पूरे नहीं कर पा रहे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर निर्माण कार्य बीच में रुक जाने से अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात का मौसम नजदीक है और अधूरे निर्माण कार्य भविष्य में और बड़ी समस्या बन सकते हैं। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो कई योजनाओं का लाभ प्रभावित होगा।

सरपंचों की दो टूक चेतावनी

जनसुनवाई में पहुंचे पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से सात दिनों के भीतर रेत उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना है कि विकास कार्यों की जिम्मेदारी पंचायतों पर है, लेकिन आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं होने से जनप्रतिनिधियों को जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है।

सरपंचों ने स्पष्ट कहा कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो जिलेभर की पंचायतें सामूहिक रूप से तालाबंदी कर व्यापक आंदोलन शुरू करेंगी। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

रेत संकट को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि अवैध खनन रोकने और विकास कार्यों के लिए वैध रेत उपलब्ध कराने के बीच संतुलन बनाने में प्रशासन सफल नहीं हो पाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायतों और निर्माण एजेंसियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय पर रेत उपलब्ध कराई जाए तो विकास कार्यों में रुकावट नहीं आएगी। इसके लिए दीर्घकालिक नीति और प्रभावी आपूर्ति व्यवस्था की आवश्यकता है।

सात दिन बाद हो सकता है बड़ा आंदोलन

सरपंचों द्वारा दिए गए सात दिन के अल्टीमेटम ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जिलेभर के पंचायत प्रतिनिधियों की एकजुटता यह संकेत दे रही है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है।

बालाघाट में रेत संकट अब केवल निर्माण सामग्री की कमी का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीण विकास, जनहित योजनाओं और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

मूकनायक की बात

रेत की उपलब्धता और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। विकास कार्यों में बाधा का सीधा असर ग्रामीण जनता पर पड़ता है। ऐसे में आवश्यक है कि शासन, प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधि मिलकर शीघ्र समाधान निकालें, ताकि विकास कार्यों की गति पुनः तेज हो सके और ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।

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