
मूकनायक/सत्यशील गोंडाने
बालाघाट
जबलपुर। अनुसूचित जनजातीय विकास विभाग में सहायक आयुक्त पद पर कार्यरत एक अधिकारी की सेवानिवृत्ति से पूर्व आयोजित विदाई कार्यक्रम उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब बड़ी संख्या में पहुंचे छात्रों ने पारंपरिक सम्मान के बजाय उन्हें ‘बेशरम’ के फूल भेंट कर विरोध दर्ज कराया। छात्रों ने अधिकारी के कार्यकाल पर भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और छात्र हितों की अनदेखी के आरोप लगाते हुए कार्यालय परिसर में प्रदर्शन किया।
जानकारी के अनुसार संबंधित अधिकारी 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। अवकाश के कारण विभागीय स्तर पर उनका विदाई कार्यक्रम पूर्व निर्धारित तिथि पर आयोजित किया जा रहा था। इसी दौरान विभिन्न छात्रावासों एवं छात्र संगठनों से जुड़े छात्र कार्यालय पहुंचे और अधिकारी के कार्यकाल को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की।
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप था कि अधिकारी के कार्यकाल में छात्रावासों की समस्याओं, छात्रवृत्ति वितरण, मूलभूत सुविधाओं तथा विद्यार्थियों से जुड़े कई मामलों में गंभीर लापरवाही बरती गई। छात्रों ने कहा कि कई बार शिकायतें और ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।
विरोध के दौरान छात्रों ने प्रतीकात्मक रूप से ‘बेशरम’ के फूल भेंट करते हुए कहा कि यह उनके अनुसार अधिकारी के कार्यकाल का प्रतीक है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि विभागीय कार्यों में पारदर्शिता का अभाव रहा, जिससे विद्यार्थियों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रशासन से विभागीय कार्यप्रणाली की जांच कराने तथा विद्यार्थियों की समस्याओं के निराकरण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। कुछ समय के लिए कार्यालय परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा, हालांकि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई।
छात्रों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत अपमान करना नहीं, बल्कि विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं के खिलाफ अपनी आवाज उठाना है। उन्होंने मांग की कि भविष्य में ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति की जाए जो विद्यार्थियों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन सुनिश्चित करें।
इस अनोखे विरोध प्रदर्शन की शहरभर में चर्चा है। सामान्यतः सेवानिवृत्ति के अवसर पर अधिकारियों को सम्मानपूर्वक विदाई दी जाती है, लेकिन इस मामले ने विभागीय जवाबदेही, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

