Thursday, June 11, 2026
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जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत 77 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को जल गुणवत्ता जांच का प्रशिक्षण

मूकनायक समाचार | सत्यशील गोंडाने | बालाघाट

जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) द्वारा ग्राम स्तर पर पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जनपद पंचायत खैरलांजी में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में खरखड़ी, भौरगढ़ एवं खैरलांजी सेक्टर की 77 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम का आयोजन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग बालाघाट के कार्यपालन यंत्री बी.एल. उइके के मार्गदर्शन में पीएचई उपखंड खैरलांजी द्वारा किया गया। प्रशिक्षण में ब्लॉक समन्वयक मोहिनी पटले एवं केमिस्ट नेमसिंह मर्सकोले ने जल गुणवत्ता परीक्षण की तकनीकी जानकारी प्रदान की। इस दौरान सभी प्रतिभागियों को एफटीके किट के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया तथा उनकी यूजर आईडी भी तैयार की गई।

प्रशिक्षण का प्रमुख आकर्षण फील्ड डेमो रहा, जिसमें आंगनवाड़ी केंद्रों एवं विद्यालयों से लाए गए पेयजल नमूनों की मौके पर ही जांच कराई गई। कार्यकर्ताओं को पानी में मौजूद विभिन्न तत्वों की पहचान तथा जल गुणवत्ता के आकलन की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान पीएच मान, फ्लोराइड, आयरन (लौह तत्व) एवं पानी की कठोरता (हार्डनेस) जैसे महत्वपूर्ण मानकों की जांच की जानकारी दी गई।

सहायक यंत्री जितेंद्र कारमेघे ने बताया कि कटंगी एवं खैरलांजी उपखंडों के लिए एक ही प्रयोगशाला उपलब्ध होने के कारण सभी गांवों के जल नमूनों की नियमित जांच प्रयोगशाला में कर पाना संभव नहीं है। इसी उद्देश्य से ग्राम स्तर पर एफटीके किट उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर ही जल गुणवत्ता की निगरानी की जा सके। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से मानसून पूर्व अपने क्षेत्र के कुओं, हैंडपंपों एवं नल-जल योजनाओं के जल स्रोतों की अनिवार्य रूप से जांच करने का आग्रह किया।

उपयंत्री विनोद कुमरे ने निर्देश दिए कि सभी पेयजल स्रोतों का वर्ष में कम से कम दो बार—मानसून पूर्व एवं मानसून पश्चात—जल परीक्षण अवश्य किया जाए, जिससे जलजनित बीमारियों की रोकथाम सुनिश्चित हो सके।

प्रशिक्षण के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने स्वयं जल नमूनों की जांच कर सीखी गई तकनीकों का अभ्यास किया। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि इस पहल से ग्राम स्तर पर जल गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी तथा आंगनवाड़ी केंद्रों, विद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में हरीश झा, शीतल मिश्रा, रानी सिंह राजपूत, परमानंद ठाकरे, मोहिनी पटले, श्रुति डहाटे, अजय भरतकर तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी लकेश ऊके सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों का विशेष सहयोग रहा।

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