Sunday, July 26, 2026
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कानून हमें वर्षों बाद न्याय दे सकता है, लेकिन समाज और परिवार में सुरक्षा, सम्मान और शांति का न्याय केवल आपसी तालमेल, विश्वास और एकजुटता से ही है सम्भव

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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समाज और परिवार के भीतर होने वाले शारीरिक और मानसिक अत्याचार आज एक गंभीर चिंता का विषय हैं। बेशक, कानून अपराधियों में डर पैदा करने और न्याय दिलाने के लिए अनिवार्य है, लेकिन कानून तब हरकत में आता है, जब अपराध घटित हो चुका होता है। इसके विपरीत, किसी भी अत्याचार को जड़ से मिटाने या उसे शुरू होने से रोकने में कानून से भी बड़ा और प्रभावी हथियार आपसी भरोसा, तालमेल और एकजुटता है। आपसी भरोसा पारिवारिक या सामाजिक शोषण अक्सर ‘चुप्पी’ के साये में फलता फूलता है। पीड़ित व्यक्ति लोक-लाज, समाज के डर या अकेले पड़ जाने के भय से अपनी बात नहीं कह पाता । जब तक समाज या परिवार ‘यह उनका आपसी मामला है’ कहकर आंखें मूंदता रहेगा, तब तक अत्याचार बंद नहीं हो सकता । जब परिवार के सदस्य या आस-पड़ोस के लोग एकजुट होकर किसी भी गलत व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो अत्याचारी का हौसला टूट जाता है।
एकजुटता पीड़ित को यह अहसास कराती है कि वह इस लड़ाई में अकेला नहीं है। यह सामूहिकता ना केवल पीड़ित को मानसिक रूप से मजबूत बनाती है, बल्कि अत्याचारी को अपने कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर देती है। कानून हमें न्याय दे सकता है, लेकिन समाज और परिवार में सुरक्षा, सम्मान और शांति केवल आपसी विश्वास, तालमेल और एकजुटता से ही आ सकती है। कानून एक मजबूत ढाल है, लेकिन आपसी भरोसा, तालमेल और एकजुटता वह सजग प्रहरी हैं, जो अत्याचार को पनपने ही नहीं देते। जब हम एक दूसरे के प्रति संवेदनशील बनेंगे, एक-दूसरे के सुख दुख में खड़े होंगे और किसी भी रूप में हो रहे अन्याय के खिलाफ मिलकर आवाज उठाएंगे, तभी हम एक सुरक्षित, स्वस्थ और भयमुक्त समाज का निर्माण कर पाएंगे।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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