मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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समय और शिक्षा जीवन के दो ऐसे अनमोल स्तंभ हैं, जिनका सही तालमेल किसी भी साधारण व्यक्ति को असाधारण बना सकता है। इन्हें यदि जीवन का ‘पावर कपल’ कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। समय जहाँ निरंतर गतिशील है, वहीं शिक्षा वह प्रकाश है, जो उस गति को सही दिशा देती है। समय दुनिया की इकलौती ऐसी संपत्ति है जिसे ना तो खरीदा जा सकता है और ना ही वापस पाया जा सकता है। जो व्यक्ति समय की कद्र करता है, समय उसे समाज में कद्र दिलाता है। सही समय पर सही कदम उठाना ही सफलता का मूलमंत्र है। बीता हुआ कल एक याद है और आने वाला कल एक रहस्य, इसलिए वर्तमान समय का सही उपयोग ही सबसे बुद्धिमानी है।
वहीं शिक्षा का अर्थ केवल डिग्रियां हासिल करना या किताबी ज्ञान तक सीमित रहना नहीं है। वास्तविक शिक्षा वह है, जो व्यक्ति के सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता का विकास करे। शिक्षा ही इंसान को आर्थिक और मानसिक रूप से स्वतंत्र बनाती है। यह हमें यह सिखाती है कि परिस्थितियों के सामने घुटने टेकने के बजाय उनका सामना कैसे किया जाए । बिना शिक्षा के समय को व्यर्थ गंवाना जीवन को अंधकार की ओर ले जाता है। जीवन में सफल, मजबूत और आत्मनिर्भर बनने का कोई शॉर्टकट नहीं है। यदि आप आज अपने समय का सम्मान करेंगे और शिक्षा को अपना हथियार बनाएंगे, तो आने वाला कल निश्चित रूप से आपका होगा। इन दोनों का सही संतुलन ही एक गौरवपूर्ण और आत्मनिर्भर जीवन की वास्तविक कुंजी है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

