मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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मां की ममता व बहन, बेटी का स्नेह इस धरा पर अमृत के समान है , जो मानवता को अमर बनाये रखती हैं । वह सबके सुख की कामना करती हैं । वास्तव में दूसरे की मां, बहन व बेटी का सम्मान करना, अपनी मां के ममत्व तथा बहन व बेटी के स्नेह का ही प्रमाण है क्योंकि कोई भी जननी, दूसरी जननी के वात्सल्य को कभी क्षति नहीं पहुंचाती, बल्कि उसकी रक्षा करती है और यही मां, बहन व बेटी के सम्मान व स्नेह की एक मात्र परीक्षा है ।
बेटी जब बड़ी होती है, तो वह दो कुलों को संस्कारित करती है। उसका स्नेह उस शीतल चांदनी की तरह है, जो तपती धूप में भी शांति देती है । स्त्री के ये तीनों रुप – मां, बहन और बेटी- समाज और परिवार की रीढ़ हैं। इनके बिना जीवन नीरस और कठोर हो जाता हैं । यदि मां ममता की मूरत है, तो बहन विश्वास की और बेटी निश्छल प्रेम की । इस धरा पर इनका स्नेह वास्तव में वह अमृत है, जिसे पाकर मनुष्य धन्य हो जाता है। हमें इनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा के प्रति सदैव तत्पर रहना चाहिए।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

