*पृथ्वी करे पुकार*
माना ! ये धरती हमारी है
सबकी बराबर हिस्सेदारी है
इसे हरा-भरा तंदरुस्त रखना
सब की जिम्मेदारी है
अगली पीढ़ी की यह हम पर उधारी है
जंगलों के जंगल जला दिए
काट पहाड़ ऊँचे घर बसा लिए
पानी के रास्ते अपनी तरफ घुमा लिए
बेज़ुबान, बेसहारा बसेरों से भगा दिए
इंसान जला ख़ुद की चिंगारी है
ना कल की किसी को चिंता है
बस आज बजा रहे डंका है
घमंड ने जलाई लंका है
इन हालात जीवन की भी शंका है
धरती माँ प्रति निभानी वफादारी है
कुदरत भी खेल दिखाएगी
जैसे को तैसा बन जाएगी
रखोगे ख़्याल तो गीत तुम्हारे गायेगी
नहीं तो अनहोनी महाप्रलय आयेंगी
रखना इंतज़ाम हर आहारी है
कभी बम बौछार होती है
कभी जहरीली गैस छोड़ी जाती है
सदा युद्धों की भरमार रहती है
कितने दुख धरती सहती है
अब ज़ख्मों पर मरहम लगाने की बारी है
पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ
सब जीवों को गले लगाओ
शुद्ध खाओ शुद्ध खिलाओ
नफ़रत का ना ज़हर फैलाओ
प्यार मुहब्बत की गुज़ारिश हमारी है
मिट्ढ़ूराम
अंग्रेजी प्राध्यापक
पीएमश्री• राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नाहर (कैथल)
M. 9466656176

