Thursday, June 11, 2026
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क्रोध एक क्षणिक आवेश है, लेकिन इसके दुष्परिणाम जीवन भर के लिए गहरे घाव और पछतावा जाते हैं छोड़

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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क्रोध अक्सर केवल कुछ ही क्षणों के लिए आता है। उन कुछ सेकंडों में व्यक्ति के सोचने-समझने की शक्ति (विवेक) लुप्त हो जाती है। मस्तिष्क पर भावनाओं का कब्जा हो जाता है और व्यक्ति वह कह बैठता है या कर बैठता है, जो वह सामान्य स्थिति में कभी नहीं करता। क्रोध के क्षण तो बीत जाते हैं, लेकिन उस दौरान किए गए व्यवहार के निशान कभी नहीं मिटते । गुस्से में कही गई कड़वी बातें कभी नहीं भुलाई जातीं। एक पल का गुस्सा सालों के भरोसे को खत्म कर सकता है, जिससे पारिवारिक और सामाजिक जीवन में स्थायी दूरी आ जाती है।
जब क्रोध शांत होता है, तो व्यक्ति को अपनी गलती का एहसास होता है। लेकिन तब तक समय हाथ से निकल चुका होता है। “कमान से निकला तीर और जुबान से निकले शब्द” कभी वापस नहीं आते। क्रोध पर विजय पाना वीरता का लक्षण है। यदि हम क्रोध के उन चंद क्षणों में मौन रहना या वहां से हट जाना सीख लें, तो हम जीवन की कई बड़ी मुश्किलों और पछतावे से बच सकते हैं। संयम ही वह कवच है, जो हमें क्रोध के विनाशकारी परिणामों से बचा सकता है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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