Friday, April 17, 2026
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राष्ट्रीय लोक अदालत में 68 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण, 12 करोड़ से ज्यादा की धनराशि का निपटारा

मूकनायक/ दुर्गेंद्र सम्राट प्रभारी बस्ती/ उत्तर प्रदेश

बस्ती। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार जनपद बस्ती में 14 मार्च 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन माननीय जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बस्ती शमसुल हक के कुशल मार्गदर्शन में जिला न्यायालय परिसर सहित सभी ग्राम न्यायालयों, तहसीलों, राजस्व न्यायालयों तथा कलेक्ट्रेट परिसर में एक साथ किया गया। लोक अदालत में विभिन्न विभागों और न्यायिक अधिकारियों के समन्वित प्रयास से बड़ी संख्या में लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण किया गया।

इस लोक अदालत में नोडल अधिकारी एवं अपर जिला जज जेबा मजीद, जिलाधिकारी कृत्तिका ज्योत्स्ना तथा पुलिस अधीक्षक यशवीर सिंह सहित प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारियों का सराहनीय योगदान रहा। उनके सहयोग से कार्यक्रम सुचारु रूप से संचालित हुआ और बड़ी संख्या में लोगों को त्वरित न्याय मिला।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान कुल 68,014 मामलों का निस्तारण किया गया। इनमें से 65,782 मामले प्री-लिटिगेशन स्तर पर बैंक ऋण तथा अन्य प्रकार के विवादों से संबंधित थे, जबकि 2,232 मामले न्यायालयों में लंबित थे, जिनका समाधान आपसी सुलह-समझौते के आधार पर कराया गया। इससे न केवल न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम हुआ बल्कि पक्षकारों को भी त्वरित और सुलभ न्याय प्राप्त हुआ।

लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई। इस दौरान 86 मामलों का निस्तारण करते हुए पीड़ितों को 3 करोड़ 32 लाख 70 हजार रुपये की धनराशि क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान की गई। इसके अलावा आपराधिक मामलों के निस्तारण के परिणामस्वरूप 2 लाख 62 हजार 200 रुपये का अर्थदंड वसूल किया गया। अन्य मामलों में 1 करोड़ 2 लाख 53 हजार 630 रुपये की धनराशि का निस्तारण हुआ। इस प्रकार कुल मिलाकर लोक अदालत के माध्यम से 12 करोड़ 2 लाख 50 हजार 605 रुपये की धनराशि का निपटारा किया गया।

इसके अतिरिक्त प्री-लिटिगेशन स्तर पर बैंक ऋण से संबंधित 1,174 मामलों का भी निस्तारण किया गया, जिनमें बैंकों और उपभोक्ताओं के बीच आपसी सहमति से लगभग 7 करोड़ 64 लाख 53 हजार 215 रुपये की धनराशि पर समझौता हुआ। इससे कई लोगों को लंबे समय से चल रहे ऋण विवादों से राहत मिली।

परिवार न्यायालय में भी लोक अदालत का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। यहां 57 पारिवारिक मामलों का निस्तारण हुआ। वर्षों से मुकदमेबाजी में उलझे कई दंपत्तियों ने लोक अदालत के माध्यम से आपसी समझौता कर अपने मतभेद समाप्त किए और साथ रहने का निर्णय लिया। इस पहल से कई टूटते हुए परिवारों को नया जीवन मिला और अनेक उजड़े घर फिर से बस गए।

लोक अदालत की विभिन्न पीठों में कई न्यायिक अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इनमें मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी मो. रिजवानुल हक, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय आराधना रानी, अपर जिला जज प्रथम शिव चंद, विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट कमलेश कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामकरन यादव, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार, विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट अनिल कुमार, अपर जिला जज एफटीसी द्वितीय विजय कुमार किटियार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष कुमार राय तथा सिविल जज (सीडी) संदीप सहित अन्य न्यायिक अधिकारियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर जिला कारागार बस्ती में निरुद्ध बंदियों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प वस्तुओं की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत “एक जिला एक उत्पाद” योजना के तहत स्थानीय उत्पादों की भी प्रदर्शनी लगाई गई, जिसे आम जनता के लिए खरीद हेतु उपलब्ध कराया गया। न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और आगंतुकों ने इन उत्पादों की खरीदारी कर स्थानीय कारीगरों और बंदियों के प्रयासों की सराहना की।

राष्ट्रीय लोक अदालत का यह आयोजन न्यायिक व्यवस्था को सुलभ, त्वरित और जनहितकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। इसके माध्यम से हजारों लोगों को लंबे समय से चल रहे विवादों से राहत मिली और न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ।

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