Friday, April 17, 2026
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धमकी के बावजूद बाराबंकी में गरजे चंद्रशेखर आजाद, बोले – संविधान के खिलाफ जाने वालों का करेंगे सामना

मूकनायक/ दुर्गेंद्र सम्राट बाराबंकी/ उत्तर प्रदेश

बाराबंकी। मान्यवर कांशीराम साहब की जयंती एवं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के छठे स्थापना दिवस के अवसर पर जनपद बाराबंकी में आयोजित संवैधानिक अधिकार बचाओ, भाईचारा बनाओ महारैली ऐतिहासिक और अभूतपूर्व रूप से सफल रही। इस महारैली में हजारों की संख्या में पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, महिलाएं, युवा और बच्चे शामिल हुए। आयोजकों के अनुसार रैली में 50 हजार से अधिक लोगों की भागीदारी ने बहुजन समाज की एकजुटता का मजबूत संदेश दिया।

महारैली को संबोधित करते हुए आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि बाराबंकी की धरती पर उमड़ा यह जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि बहुजन आंदोलन अब नई ऊर्जा, नई चेतना और नई ताकत के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बहुजन महापुरुषों का मिशन सामाजिक न्याय, समानता और अधिकारों की स्थापना करना था, जिसे आजाद समाज पार्टी पूरी मजबूती से आगे बढ़ा रही है।

चंद्रशेखर आजाद ने इस विशाल महारैली को सफल बनाने के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बाराबंकी की जागरूक, सम्मानित और संघर्षशील जनता ने जिस तरह से इस कार्यक्रम को अपना समर्थन और प्यार दिया है, वह बहुजन आंदोलन के लिए एक नई उम्मीद और प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि यह एकजुटता साफ संदेश देती है कि बहुजन समाज अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी मजबूती के साथ संघर्ष करता रहेगा।

इस दौरान चंद्रशेखर आजाद ने उन्हें मिली धमकियों के मुद्दे पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मिशन के लिए काम करने वाले लोगों को इस तरह की धमकियां अक्सर मिलती रहती हैं, लेकिन इससे डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि हम संविधान को मानने वाले लोग हैं और उसी के दायरे में रहकर संघर्ष करते हैं। लेकिन यदि कोई संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ जाने की कोशिश करेगा तो उसका सामना करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

गौरतलब है कि बाराबंकी आने से पहले चंद्रशेखर आजाद को कथित रूप से धमकी दी गई थी। जानकारी के अनुसार करणी सेना से जुड़े अभिनव सिंह नामक व्यक्ति ने उन्हें बाराबंकी आने से पहले धमकी दी थी कि यदि वे यहां आए तो जिस पांव से आएंगे उसी पांव से वापस नहीं जा पाएंगे। इस बयान के बाद कार्यकर्ताओं में काफी आक्रोश देखने को मिला था।

हालांकि प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो और कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया जा सके। प्रशासन की मुस्तैदी के चलते पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण माहौल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

महारैली में शामिल कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। कई कार्यकर्ताओं ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वे अपने नेता के समर्थन में पूरी तरह तैयार थे। उनका कहना था कि जो लोग धमकियां दे रहे थे, अगर वे सामने आते तो कार्यकर्ता उनका सामना करने के लिए भी तैयार थे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।

कार्यक्रम के दौरान एक भावनात्मक दृश्य भी देखने को मिला, जब कुछ छोटे बच्चों ने चंद्रशेखर आजाद को “भावी मुख्यमंत्री” लिखा हुआ एक पोस्टर भेंट किया। बच्चों के इस उत्साह को देखकर चंद्रशेखर आजाद ने मुस्कुराते हुए पोस्टर को स्वीकार किया और बच्चों की सराहना करते हुए कहा कि देश का भविष्य इन्हीं बच्चों के हाथों में है। उन्होंने बच्चों को शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

महारैली के दौरान कई वक्ताओं ने बहुजन महापुरुषों के विचारों, सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर संविधान और भाईचारे की रक्षा के लिए आगे आना होगा।

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने कहा कि बाराबंकी की यह महारैली बहुजन आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगी। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बहुजन समाज अपने अधिकारों और सम्मान की लड़ाई के लिए पूरी मजबूती के साथ खड़ा है और आने वाले समय में यह आंदोलन और भी व्यापक रूप लेगा।

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