मूकनायक /ताजी राम कश्यप
कुमारसेन /हिमाचल प्रदेश
ठियोग वन मंडल के अंतर्गत वन परिक्षेत्र कोटखाई, वन बीट कोटखाई के जंगल चांबीकूपड़ आर-13 में एक ही स्थान पर अचानक देवदार और कायल के 43 पेड़ के एक साथ सूखने का मामला सामने आया है बड़ी संख्या में वृक्षों का सूखना हैरानी की बात है वन रक्षक भूप राम ने कहा कि वो इस मामले में अपने स्तर पर वरिष्ठ स्थानीय लोगों से उनके अनुभव जान रहे हैं कुछ राहगीर यह भी अनुमान लगा रहे हैं कि सरकार द्वारा बागवानों से खरीदी गई सेब की बोरियां जो सेब सीजन में इस जगह रखी गई थी सड़कों के अवरूद्ध रहने के कारण मैदान में ही सड़क गई थी जिन्हें इस जगह दबाया गया है सेब के रस निकलने तथा सड़ने से वृक्षों के सूखने का शक भी कर रहे है तथा वरिष्ठ लोगों का अनुमान है कि सेब का फल गुणकारी होता है इस के सड़ने तथा वनों में फैंकने से आज तक कोई भी वन वृक्ष सूखते हुए नहीं देखा है उन्होंने यह भी कहा कि 1982-83 में हिमाचल प्रदेश में सकैव रोग से सेब के फलों को भारी नूकसान हुआ था और सैकड़ों बोरीयां नाले में फैंकी गई थी परन्तु वृक्षों के सूखने का मामला सामने नहीं आया आते जाते कुछ राहगीर ने शरारती तत्वों द्वारा जानबूझ कर वृक्षों पर रसायन के छिड़काव की आशंका जताई वन विभाग के कर्मचारियों तथा अधिकारीयों में इस मामले की जांच बारे बैठक और विचार विमर्श तेज हो गया है विभाग को यह भी आशंका है कि वनों में किसी संक्रमित रोग का होना भी हो सकता है विभाग ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं परन्तु बिना ठोस प्रमाण के कारणों की पुष्टि नहीं कर सकते ।

