एक दिवसीय वैचारिक धम्म संगोष्ठी का सफल आयोजन
छत्तीसगढ़
“दि बुद्धिष्ट प्रचारक विंग छत्तीसगढ़” द्वारा मध्यप्रदेश के कोहका टोला (लोरा), मलाजखंड में एक दिवसीय वैचारिक धम्म संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आयु. अशोक यैगारे के निज निवास पर संपन्न हुआ। आयोजन में सम्यक बौद्ध समिति एवं आयुष्मान युवराज बारमाटे जी (भिमजौरी, मलाजखंड) का विशेष सहयोग रहा, जिनके प्रति संगठन ने आभार व्यक्त किया।
संगोष्ठी का शुभारंभ त्रिशरण एवं पंचशील के साथ हुआ। इसके पश्चात डॉ. सरोज बौद्ध द्वारा भारतीय संविधान की उद्देशिका का वाचन किया गया तथा उपस्थित जनों से महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे गए। सही उत्तर देने वालों को सृष्टि द्वारा पेन प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।
इस संगोष्ठी का मुख्य विषय था — “डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की धम्मक्रांति: एक अनवरत चलने वाला आंदोलन”। इस विषय पर उपासक एवं उपासिकाओं ने अपने विचार रखे। सविता बौद्ध ‘संकल्पी’ ने विषय पर विस्तृत और प्रेरणादायक उद्बोधन दिया, जिसमें उन्होंने 22 प्रतिज्ञाओं, बौद्ध संस्कारों एवं बौद्ध पर्वों की गहन जानकारी साझा की। उनके स्वलिखित गीतों ने कार्यक्रम को और अधिक प्रेरणादायक बनाया।
जयश्री बौद्ध जी ने बौद्ध अनुयायियों को किन बातों से दूर रहना चाहिए, इसे उदाहरण सहित स्पष्ट किया। वहीं वंदना बौद्ध जी ने बौद्धों के कर्तव्यों और जीवन पद्धति पर प्रकाश डाला। सुलोचना बौद्ध जी ने अपने गीत के माध्यम से धम्म संदेश प्रस्तुत किया।
संगोष्ठी में वर्तमान सामाजिक स्थिति पर भी गंभीर चर्चा हुई। विशेष रूप से युवाओं द्वारा अंतर्जातीय विवाह के कारण समाज में हो रहे आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभावों पर विचार-विमर्श किया गया। यह चिंता व्यक्त की गई कि इससे समाज की संरचना कमजोर हो रही है और सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो रही है।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि “संस्कारों की जानकारी के अभाव में बौद्ध संस्कृति सशक्त रूप से विकसित नहीं हो पाई है, इसलिए हमें अपने संस्कारों को विचार, उच्चार और आचार में अपनाना होगा।”
कार्यक्रम के अंतर्गत जयश्री बौद्ध द्वारा उपस्थित उपासक-उपासिकाओं को 22 प्रतिज्ञाएं दिलाई गईं। “दि बुद्धिष्ट प्रचारक विंग छत्तीसगढ़” द्वारा अशोक यैगारे परिवार को “यदि बाबा न होते” पुस्तक एवं वर्ष 2026 का कैलेंडर सप्रेम भेंट किया गया।
अंत में मंगल मैत्री के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ तथा वंदना बौद्ध जी ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर उपस्थित सभी बुद्ध-आंबेडकरी अनुयायियों, युवाओं एवं बच्चों को साधुवाद दिया गया।
संदेश:
“बौद्ध बने, बौद्ध लिखें, बौद्ध दिखें।”







