Friday, April 17, 2026
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आईएएस प्रशिक्षुओं ने आईसीएआर–नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटिक स्ट्रेस मैनेजमेंट, रायपुर का किया भ्रमण, कृषि अनुसंधान की उन्नत सुविधाओं से हुए परिचित

वर्ष 2024 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के प्रशिक्षु अधिकारियों ने कृषि में जैविक तनाव प्रबंधन से संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान और संस्थागत कार्यप्रणाली को समझने के उद्देश्य से ICAR–National Institute of Biotic Stress Management (आईसीएआर–नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटिक स्ट्रेस मैनेजमेंट), रायपुर का शैक्षणिक भ्रमण किया।
भ्रमण के दौरान संस्थान के निदेशक Dr. P. K. Rai ने प्रशिक्षु अधिकारियों से संवाद करते हुए संस्थान के विज़न, मिशन, दायित्वों तथा कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फसलों को प्रभावित करने वाले जैविक तनावों पर अनुसंधान करना वर्तमान कृषि व्यवस्था की प्रमुख चुनौतियों में से एक है और इस दिशा में संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
डॉ. राय ने संस्थान में चल रहे तथा भविष्य में प्रस्तावित अनुसंधान कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि कीट, रोग तथा अन्य जैविक कारकों से होने वाले फसल नुकसान को कम करने के लिए टिकाऊ और वैज्ञानिक समाधान विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार गतिविधियों के माध्यम से किसानों को सहयोग प्रदान करते हुए कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने में सक्रिय योगदान दे रहा है।
संस्थान के संयुक्त निदेशक Dr. Pankaj Sharma ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संस्थान में उपलब्ध अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं के बारे में अवगत कराया। इनमें केमिकल इकोलॉजी प्रयोगशाला, टिशू कल्चर प्रयोगशाला, एनालिटिकल प्रयोगशाला, ओपन टॉप चैंबर सुविधा, जीनोम एडिटिंग प्रयोगशाला, मॉलिक्यूलर बायोलॉजी प्रयोगशाला, ग्लासहाउस तथा प्लांट ग्रोथ चैंबर्स शामिल हैं।
आईएएस प्रशिक्षुओं ने विभिन्न प्रयोगशालाओं का भ्रमण कर वैज्ञानिकों से संवाद भी किया और संस्थान में हो रहे अत्याधुनिक अनुसंधान कार्यों में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने संस्थान की उन्नत वैज्ञानिक सुविधाओं और अनुसंधान गतिविधियों की सराहना की।
यह शैक्षणिक भ्रमण भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए उपयोगी अनुभव सिद्ध हुआ, जिससे उन्हें उभरती कृषि चुनौतियों से निपटने तथा टिकाऊ फसल उत्पादन को बढ़ावा देने में वैज्ञानिक संस्थानों की भूमिका को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. पंकज शर्मा, संयुक्त निदेशक द्वारा किया गया।


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