मूकनायक , बालाघाट ब्यूरो -आकाश घरडे़
बालाघाट, 08 सितंबर/ मूकनायक। मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल बालाघाट से इस बार राष्ट्रीय राजनीति की एक नई गूंज उठी है। यहाँ से जनता की आवाज़ बुलंद हुई है –“अबकी बार राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा बनाएंगी सरकार।”इस नारे ने न केवल स्थानीय राजनीति को नई दिशा दी है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सत्ता समीकरण बदलने का संकेत दिया है।
गोपाल ऋषिकर भारती का आगमन
इसी बीच बालाघाट में सामाजिक चेतना से जुड़े गोपाल ऋषिकर भारती का आगमन हुआ। उनके आगमन से जिले का माहौल और अधिक सक्रिय हो गया। उन्होंने लोगों से संवाद करते हुए कहा कि देश और समाज को अब ऐसी सरकार चाहिए जो जनता के वास्तविक मुद्दों—रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों की समस्याओं—को प्राथमिकता दे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक समाज अपनी सामूहिक शक्ति को नहीं पहचानता, तब तक बदलाव अधूरा रहेगा। उनके विचारों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में सामाजिक संगठनों के प्रमुख एवं और युवा मौजूद रहे।
जनता की ताकत से उठी आवाज
बालाघाट के गाँव-गाँव से उठ रही यह आवाज़ अब राष्ट्रीय पटल पर गूंज रही है। लोग कह रहे हैं कि अब चुनावी नारों और वादों से आगे बढ़कर उन्हें ठोस नीतियाँ और जमीनी बदलाव चाहिए। एक स्थानीय युवा ने कहा – “हमारे भविष्य का सवाल है, इस बार हम अपने वोट से ही तय करेंगे कि दिल्ली में कौन बैठेगा।” विशेषज्ञों का मानना है कि बालाघाट जैसे जिलों से उठी आवाज़ें ही लोकतंत्र की असली ताकत होती हैं। यदि यह स्वर व्यापक जनसमर्थन पाता है तो राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा सत्ता की ओर बड़ा कदम बढ़ा सकता है। वही सर्किट हाउस की बैठक मे उपस्थित हाजी शोएब खान, भुवन सिंह कोर्राम, जुनैद अहमद खान,दिलीप बाघमारे, इमरान खान, मिलिंद भालेकर, सैययद मुस्ताक अली,अंकित सरकार, आकाश घरडे सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

