
मूकनायक/जहूर अली
बिलासपुर छत्तीसगढ़
हर साल की तरह इस साल भी अंजुमने हुसैनी जाफरी ईरानिया ने हज़रत इमाम हुसैन का चालीसवां मनाया जो 10 मोहर्रम को शहीद कर दिया गया था उनके 72 साथियों के साथ मे जिसमें 18 बनी हाशिम उनके खुद के परिवार शामिल थे, जिसमें छै माह का बच्चा अलीअसगर,18 साल का अली अकबर,60 साल के बुजुर्ग हबीब इब्ने मज़हिर शामिल थे जिन्हें उस समय के यजीद नाम का ज़ालिम बादशाह ये चाहता था कि उनके शासन में जो गलत कामों को अंजाम दे रहे थे शराब, जुआ , ज़िनाकारी, गरीबों बेवाओं, यतीमो पर जुल्म करना, शामिल था ओर हजरत इमाम हुसैन ये सब के ख़िलाफ़ थे क्योंकि उनके नाना हज़रत जनाबे रसूले खुदा पैग़म्बरे खुदा के दीन में ये सब काम की सक्त मनाही थी इसलिए, हज़रत इमाम हुसैन ने यजीद के हाथ पर समर्थन नहीं किया l
जिसके कारण लाखों फौज के साथ मे यजीद ने इमाम हुसैन को करबला की सरजमीन पर घेरकर तीन दिन का भूखा प्यासा शहीद किया गया, पर आज पूरी दुनिया में हज़रत इमाम हुसैन का नाम लिया जाता है उनके शहादत को याद किया जाता है और ज़ालिम यजीद का नाम लेना वाला कोई बाकी नहीं है, आज इमाम हुसैन का चालीसवां उसी एक पैगाम है आज इमाम बाड़ा में मौलाना ज़ीशान रिज़वी साहब ने तकरीर पढ़ा उसके बाद जुलुस ईरानी समुदाय के द्वारा चांटीडीह से रपटा चोक, मानसरोवर चौक, गोल बाजार, सदर बाजार, मध्य नगरी चौक सत्य चोक होते हुए खामोश गंज कब्रस्तान में जाकर अलम व झूले अली असगर को ठंडा आने वाले साल तक समाप्त)किया गया l
जुलुस समाज के प्रमुख दिलशेर अली के सरपरस्ती में निकला जिसमें ज़ाकिर अली, जहूर अली, रायगढ़ से बेज़ाद अली, साबर अली, शेरखान सरताज अली, नजर हुसैन काला ईरानी, बाबर अली, यावर अली, मंजूर अली, अली रज़ा ईरानी, बरकत अली, राजू ईरानी सैकड़ों औरत बच्चे जवान शामिल हुए l

