Friday, April 17, 2026
HomeUncategorizedरायपुर जनमंच में गूँजा परसाई का व्यंग्य : “प्रेमियों की वापसी” का...

रायपुर जनमंच में गूँजा परसाई का व्यंग्य : “प्रेमियों की वापसी” का अनोखा मंचन

मूकनायक

रायपुर, छत्तीसगढ़

जब व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई का नाम लिया जाता है तो समाज और राजनीति पर करारी चोट करने वाले उनके लेखन की याद आती है। किंतु रविवार को रायपुर के जनमंच में दर्शकों ने उनके लेखन का एक अलग आयाम देखा। बिलासपुर की संस्था अग्रज नाट्य दल ने परसाई का व्यंग्य-नाटक “प्रेमियों की वापसी” मंचित किया। पूरे नाटक के दौरान सभागार हँसी और विचार की लहरियों से गूँजता रहा।

नाटक की कथा उन प्रेमियों से शुरू होती है जो आत्महत्या कर परलोक पहुँचते हैं। यहाँ व्यंग्य यह उजागर करता है कि प्रेम केवल सामाजिक बंधनों से ही नहीं, बल्कि भीतर की सच्चाई और परख से भी गुजरता है। प्रेम विवाह की मनाही से त्रस्त दो युवक-युवती मृत्यु को अपनाते हैं ताकि परलोक में विवाह कर सकें। परंतु वहाँ पहुँचकर परिस्थितियाँ उन्हें बताती हैं कि उनका प्रेम उतना अडिग नहीं है।

सुनील चिपड़े के निर्देशन ने इस रचना को नया आयाम दिया। उन्होंने केवल परलोक की कथा नहीं दिखाई, बल्कि मंच पर उस आत्मघाती निर्णय तक की पूरी यात्रा भी दर्शकों के सामने रखी। इस कारण दर्शकों को कहानी का भावनात्मक आधार भी महसूस हुआ और व्यंग्य का तीखापन भी।

गीत और संगीत ने प्रस्तुति को और सजीव किया। सुमेधा अग्रेश्री के गीतों को कुणाल भांगे और आकांक्षा बाजपेई ने सुरों से सँवारा। इन गीतों ने कभी गुदगुदाया, तो कभी सोचने पर मजबूर किया।

मंच पर जीवंत हुए पात्र:

प्रेमेंद्र : विक्रम सिंह राजपूत

रंजना : आकांक्षा बाजपेई

चाचा : अरुण भांगे

मेमसाब : प्रियंका हर्षल

हेडमास्टर सक्सेना : मनीष सोनवानी

हेडमिस्ट्रेस : मिसेस शर्मा

पुलिस : हर्षल नागदेवते

प्रेमविवाह संचालिका : ऐश्वर्यलक्ष्मी बाजपेई

विधाता : स्वप्निल तावड़कर

सचिव : क्षितिज महोबिया

मंचपरे सहयोग:

निर्देशन : सुनील चिपड़े

गीत : सुमेधा अग्रश्री

संगीत : कुणाल भांगे, आकांक्षा बाजपेई

सहयोग : अर्पिता बेडेकर

यह प्रस्तुति छत्तीसगढ़ फिल्म एंड आर्ट सोसाइटी के तीन दिवसीय आयोजन “रंग परसाई” का समापन कार्यक्रम थी। लगातार तीन दिन तक परसाई पर विमर्श और उनके नाटकों की प्रस्तुतियाँ हुईं। अंतिम दिन अग्रज नाट्य दल ने अपनी कला से साबित किया कि परसाई आज भी उतने ही प्रासंगिक और जीवंत हैं जितने अपने समय में थे।

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments