मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन में बुरे लोगों की जीत तो उसी वक़्त तय हो जाती है, जिस वक़्त अच्छे लोग खामोश रहने का निर्णय ले लेते हैं । जो आपको धोखा दे गया, उसकी यादों में मरने से हज़ार गुना वह अच्छा है, जो साथ है, उसके साथ सुकून से जी लिया जाए । मानव जीवन में हँसी और रुलाई दोनों सदा रहते हैं। जैसे सबेरा होता है, शाम होती है, फिर सबेरा होता है, वैसे ही जीवन में दुख और सुख भी आते हैं, इस तरह सुख-दुख में हँसते रोते मानव जीवन आगे बढ़ता है। सुख की हँसी और दुख की रुलाई दोनों मानव जीवन का हिस्सा होता है।
कुछ बुरे लोगों की पहचान उनकी ख़राब नजरों से भी की जा सकती है। निगाहों के भिन्न भिन्न भाव भिन्न भिन्न प्रकार की बुराई के प्रतीक होते हैं, जिसे देखकर सहज ही समझा जा सकता है। कुछ बुरे लोग झूठ का सहारा लेकर अपनों की या दूसरों की जिंदगी में ज़हर घोलने का प्रयास करते हैं। इस तरह के बुरे लोग किसी का जीवन हमेशा के लिए बर्बाद कर देते हैं। हमारे आधे दुःख गलत लोगों से उम्मीद रखने से होते हैं और बाकि आधे दुःख सच्चे लोगों पर शक करने से होते हैं । इतना जरूर याद रखना.. जो तकलीफ़ हम खुद बर्दाश्त नहीं कर सकते, वह तकलीफ़ दूसरों को नहीं देनी चाहिए।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

