मूकनायक /देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
1983 के शुरुआती दिनों की बात है। साहेब दिल्ली में करोल बाग के दफ्तर में बैठे हुए थे। उनके पास छत्तीसगढ़ से आए हुए ऋषिकर भारती भी बैठे थे। साहेब ने उनको बातों-बातों में मजाक करते हुए पूछा- मैंने तो तुझे नहीं रोका फिर तू शादी क्यों नहीं करता?
ऋषिकर भारती ने कहा- सर जी, मैंने शादी ना करने की कोई कसम तो नहीं खाई हुई पर मैं आपको देश का पहला पी.एम. (प्रधानमंत्री) बने हुए देखना चाहता हूँ। शादी तो बाद में हो ही जाएगी।
थोड़ा शांत रहने के बाद कांशी राम जी ने गंभीर होकर जवाब दिया कि पता नहीं, मैं प्रधानमंत्री बन सकूँगा या नहीं, लेकिन मैं ऐसा संगठन तैयार कर रहा हूँ कि एक दिन बाबा साहेब के मिशन को मानने वाला जरूर कोई ना कोई इस मुल्क का प्रधानमंत्री बनेगा।
बाद में ऋषिकर ने साहेब के मिशन से प्रभावित होकर ‘बालको’ में ऑपरेटर की नौकरी भी छोड़ दी तथा जिंदगी भर शादी नहीं की।
अगर आप के ऊपर अत्याचार होता है तो हमें 24 घंटे के अंदर ही एक लाख लोगों को इकट्ठे करके संसद के आगे संघर्ष शुरू कर देना चाहिए। अगर संसद का सेशन ना चल रहा हो तो एक लाख लोगों द्वारा प्रधानमंत्री आवास को घेर लेना चाहिए। अगर फिर भी बात ना बने तो एक हफ्ते के भीतर-भीतर 5 लाख लोग फिर उसी जगह पर इकट्ठे हो जाने चाहिए-साहेब कांशी राम।
साहेब के जीवन के बारे में प्रतिदिन एक लेख प्रकाशित करते है। तां कि महांपुरुषों की विचारधारा को घर-घर तक पहुंचाया जाऐ।
प्रस्तुत करते है।
इंजीनियर तेजपाल सिंह
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जुॅग पलटाऊ बहुजन महानायक
पुस्तक मैं कांशीराम बोलता हूं।
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