Thursday, February 26, 2026
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जीवन और सत्य का बोध ही है आत्मज्ञान

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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संसारिक सागर को पार करना ही जीवन की साधना है। इंसान को तैरना आए तो पानी आनंद देता है और तैरना नहीं आए तो डूबो देता है।अग्नि का सही उपयोग करें तो अंधेरा मिटाती है, खाना बनाती है, नहीं तो आग लगा देती है। अपने जीवन में ज्ञान और अध्यात्म के द्वार सदा खुले रखिए।
सूरज दिन में उजाला देता है, चांद रात को उजाला देता है, परंतु जो ज्ञान के प्रकाश में जीता है, वह हर पल उजाले में ही जीता है। इसलिए सजगता और सचेतनता ही साधना की चाबी है। जीवन और सत्य का बोध ही आत्मज्ञान है। जो सजगता पूर्वक प्रत्येक कार्य को करता है, वह संसारिक सागर से पार लग जाता है, मुक्त हो जाता है, जीवन सुखमय हो जाता है ।
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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