Thursday, February 26, 2026
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बेतरतीब खनन से समझौता दे रहा हैं हादसों को न्योता

मूकनायक उत्तरप्रदेश

संवाददाता -:सुऐब अहमद

सोनभद्र – खनन मानकों से समझौता बड़े हादसों को दे रहा हैं न्योता।बात अगर बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र के बारी डाला की करें तो खदानों की भौगोलिक स्थिति देखकर कलेजा मुंह को आ जायेगा।खनन नियमावलियो की बात करें तो खनन निदेशालय द्वारा श्रमिकों के हितों के लिए बड़े ही कठोर नियमों को बनाया गया है लेकिन जब नज़र खनन क्षेत्र डाला बारी क्षेत्र की ओर जाती हैं तो परिस्थितियां भिन्न नजर आती हैं। कुछ दिन पूर्व ही डाला बारी खनन क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसा हुआ था जहां अचानक टीपर पलटने से चालक की मौत हो गई थी।उक्त घटना के बाद परिजन खनन क्षेत्र में ही इधर उधर अपने परिवार के सदस्य को खोज रहे थे।जबकि खनन शिकायतों के जांच के लिए लखनऊ की टीम भी सोनभद्र में जांच के लिए आई थी।प्राप्त जानकारी के अनुसार भारी भरकम मशीनों की गड़गड़ाहट और हैवी ब्लास्टिंग से पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा हैं।पहाड़ों के सीने पर बड़े मशीनों के पंजों ने पहाड़ों को खोदकर पताललोक से मिला दिया हैं जिससे बेतरतीब खनन में श्रमिकों की सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह भी खड़ा हो रहा है।बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र के अंतर्गत बारी डाला में स्थित पट्टा धारक सुरेश चंद्र गिरी के संचालित खदान अक्सर चर्चाओं में बनी रहती है।चर्चाओं में बने रहने का आशय यह है कि कभी मानक के विपरित खनन तो कभी बिना सेफ्टी सुरक्षा के ही हाइट पर मजदूरों को कार्य करवाने से हैं जिसकी चर्चाएं दबे आवाज में ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अक्सर देखने को मिल जाती हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में संचालित पट्टा सुरेश चंद्र गिरी खदान में बेतरतीब ढंग से हो रहे खनन से बड़े पैमाने पर टीपरो द्वारा बोल्डर लोड करके परिवहन जारी है।मानकों की बात करें तो पत्थर खदानों की गहराई को लेकर मानक तय हैं फिर भी यदि गहरी पत्थर खदानों में खनन स्वीकृति होती हैं तो उसमें कठोर नियमों के पालन के निर्देश होते हैं।खनन नियमावली के अनुसार खनन क्षेत्र में पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन,सुरक्षा के उपाय,खदान के आकार,श्रमिकों की सुरक्षा,वायु प्रदूषण,जल प्रदूषण आदि को ध्यान में रखना होता है लेकिन पत्थर खदान में देर शाम तक परिवहन,बेतरतीब खनन,श्रमिकों की सुरक्षा के बैगर कार्य पर विभागीय उदासीनता के कारण अवैध खनन जोरों पर जारी हैं।बात विभागीय शिकायतो का करें तो खनन शिकायतो की एक लम्बी फेयरलिस्ट सोशल मीडिया पर मौजूद हैं।गहरी खदान में बड़े बड़े पोकलेन मशीनों का प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा हैं वहीं उक्त खदान से सटी एक बड़ी आबादी भी वहां निवास करती हैं।जहां ग्रामीणों की मानें तो खनन क्षेत्र में ब्लास्टिंग से घर की दीवारों में दरारे पड़ गई हैं।वहीं स्थानीय लोगों ने कहां कि खनन रोजगार के लिए आवश्यक है लेकिन खनन नियमावलियो का पालन, पर्यावरण सुरक्षा के साथ,श्रमिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिम्मेदारों को निर्वहन करना चाहिए जिससे कि पर्यावरण और श्रमिक की सुरक्षा से खिलवाड़ ना हो। जनपद सोनभद्र खनिजों का एक बड़ा जनपद हैं लेकिन इसके साथ श्रमिकों के हितों का भी ध्यान रखना होगा।अपने जरूरतों के लिए अधिक पर्यावरण का दोहन, श्रमिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ किसी भी प्रकार से सही नहीं है।

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