Thursday, February 26, 2026
Homeदिल्लीभारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से देश में...

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से देश में राष्ट्रीय शोक

मूक नायक

नई दिल्ली, विमल वर्मा ( समाचार सम्पादक)

देश के दो बार प्रधान मंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। गुरुवार 26 दिसंबर 2024 को उन्होंने 92 साल की उम्र में दिल्ली के एम्स में अपनी अंतिम सांस ली। उन्हें सांस लेने में दिक्कत महसूस बताई जा रही थी जिसके चलते उन्हें दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका निधन हो गया। उनके निधन से देश में शोक की लहर दौड़ गई है। देश को आर्थिक उंचाईयां देने वाले सरदार डॉक्टर मनमोहन सिंह बहुत ही पढ़े-लिखे बुद्धिमान व्यक्ति थे, उन्होंने विश्व के प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज से डिग्री हासिल की थी। पूर्व प्रधान मंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 में पश्चिमी पंजाब में हुआ था। उनके पिता का नाम गुरुमुख सिंह और उनकी माता का नाम अमृत कौर था। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने 1948 में मैट्रिक और 1950 में इंटरमीडिएट की परीक्षा फर्स्ट क्लास से पास की थी। डॉक्टर मनमोहन सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पंजाब यूनिवर्सिटी से प्राप्त की थी। यहां से उन्होंने 1952 में इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन और 1954 में मास्टर्स की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई करने के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी चले गए थे, जहां से उन्होंने इकोनॉमिक्स में फर्स्ट क्लास प्राप्त कर अपनी योग्यता का लोहा मनवाया था। इसके बाद 1962 में उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के नफील्ड कॉलेज से डॉक्टर फिल की डिग्री भी हासिल की थी।
मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक कांग्रेस की ओर से दो बार भारत के प्रधानमंत्री रहे और उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देकर देश में आर्थिक उन्नति के इतिहास रचे हैं।
मनमोहन सिंह ने अपने करियर की शुरुआत पंजाब यूनिवर्सिटी में बतौर लेक्चरर के रूप में की और बाद में वे दिल्ली यूनिवर्सिटी में रहे। 1950 के दशक में उन्होंने आर्थिक मामलों में शोधकर्ता के रूप में बेहद सराहनीय काम किया जो उनकी नायाब काबलियत को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1971 में आर्थिक सलाहकार के पद पर नियुक्त किया था। इसके बाद वे योजना आयोग के उपाध्यक्ष और भारतीय रिजर्व बैंक (R.B.I) के गवर्नर के पद पर भी रहे। भारत में यह पहले प्रधान मंत्री हैं जिनके भारत के नोटों पर हस्ताक्षर अंकित है। 1991 में उन्हें वित्त मंत्री का कार्यभार भी सौंपा गया। उन्होंने अपने कार्यकाल में ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों की वो उड़ान भरी कि देश विदेश में उनकी ख्याति फैलने लगी। देश की अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश के दरवाजे खुले और आर्थिक विकास को गति मिली। इसके बाद वे 2004 से 2014 तक कांग्रेस पार्टी की ओर से देश के दो बार प्रधानमंत्री बने। भारत ने ऐसा महान अर्थ शास्त्री खो दिया है जिसने विश्व आर्थिक मंदी के दौर में भी देश को अपनी सूझ बूझ और दूरदर्शिता से संभालने का अद्भुत सराहनीय कार्य किया है। उनके निधन से देश में शोक फैल गया है।

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments