मूकनायक
राजस्थान /केकड़ी )भिनाय
आलोक बैरवा सरपंच तेलाड़ा
बिजयनगर
# मंडी भाव से दो से तीन गुना तक वसूले जा रहे है कई सब्जियों से दाम ~ सरकार के अंकुश ना होने से लूटते रहने को मजबूर है आम नागरिक •••
मूकनायक की इस एक्सक्लूसिव खबर में आज हम एक बार फिर खुलासा करने जा रहे है बाजार में सब्जी बेचने वाले उन दुकानदारों का , जो आपस में सांठगांठ करके खुलेआम आम जनता को लूटने में जुटे है । खास बात यह है कि मूकनायक के माध्यम से हमने बीते महीने भी लुट के इस खेल का खुलासा करते हुए आम जनता के सामने सब्जी मंडी के भाव और दुकानदारों द्वारा वसूले जा रहे कई गुना ज्यादा भाव की जानकारी देकर लूट के इस खेल की सच्चाई बताने की कोशिश की थी । लेकिन इसके बावजूद सब्जी व्यापारी सुधरने को तैयार नहीं है । उनके द्वारा आज भी सब्जी मंडी से दोगुने दाम पर सब्जियां बेची जा रही है यही वजह है कि लुट का यह खेल आज भी बदस्तूर जारी है ।
आपको बता दें कि बीते कई महीनों से सब्जियों के आसमान छूते दामों की आज एक बार फिर हमने ग्राउंड जीरो पर जाकर पड़ताल की तो होश उड़ा देने वाली हकीकत से रूबरू होना पड़ा । जिन्हे हम आम तौर पर सीधा सादा गरीब सब्जी वाला दुकानदार समझकर हर रोज खरीददारी करते है दरअसल वे आम जनता को खुलेआम लूट रहे है । हमने जब सब्जी मंडी में जाकर बाजार में बेचे जाने वाली सब्जियों की रेट का पता किया तो बुरी तरह चौंक गए । मंडी के भाव और बाजार के दाम में अंतर दोगुने से ज्यादा पाया गया । दुर्भाग्य से जो स्थिति एक महीने पहले थी वहीं स्थिति आज भी बनी हुई है ।
आम जनता के साथ इन दुकानदारों द्वारा किस हद तक लुट की जा रही है इसका आसानी से अंदाजा लगाने के लिए हम आपके सामने मंडी के भाव और बाजार में वसूली जा रही कीमतें एक साथ लिख रहे है । ताकि हमारे हजारों पाठकों को इस बात का अंदाजा हो जाए कि आखिर लुट का यह खेल किस स्तर पर खेला जा रहा है ।
सब्जी का नाम मंडी भाव बाजार भाव
आलू 24 /~ 40 /~
फूल गोभी 35 /~ 60/~
पत्ता गोभी 20/~ 40/~
लौकी 20 /~ 40/~
मूली 12 /~ 30/~
पालक 10/~ 30/~
मटर 80/~ 120/~
भिंडी 80/~ 120/~
शिमला मिर्च 40/~ 80/~
हरी मिर्च 30/~ 60/~
पतली मिर्च 50/~ 100/~
हरा धनिया 30/~ 60/~
मैथी 10/~ 30/~
लहसुन 260/~ 400/~
प्याज 42/~ 60/~
करेले 60/~ 120/~
टमाटर देशी 20/~ 60/~
टमाटर हाई ब्रीड 30/~ 70/~
अदरक 50/~ 100/~
कद्दू 25/~ 40/~
हल्दी 50/~ 80/~
मोगरी 40/~ 80/~
बैंगन 25/~ 60/~
नींबू 30/~ 80/~
लौकी 20/~ 40/~
खीरा ककड़ी 25/~ 40/~
इसी हिसाब से बाकी बची अन्य सब्जियों के दामों में भी मंडी के भाव और बाजार भाव में जमीन आसमान का फर्क नजर है । इन आंकड़ों को देखकर मूकनायक के पाठक आसानी से अंदाजा लगा सकते है कि सब्जी विक्रेताओं द्वारा किस हद तक आम जनता के साथ लूट का यह गंदा खेल खेला जा रहा है ।
# सब्ज़ियां पैदा करने वाले किसान आज भी कर्ज में डूबकर बेहाल और मंडी से खरीदकर बेचने वाले दुकानदार हो रहे है मालामाल •••
यदि हम जमीनी सच्चाई की बात करे तो पता चलेगा कि जो किसान दिन रात सर्दी गर्मी और बारिश के दौरान खेतों में जी तोड़ मेहनत करके सब्जियां उगाता है उसे उसकी मेहनत का चौथाई हिस्सा भी नसीब नहीं हो पा रहा । पहले तो उस किसान से औने पौने दामों में सब्जी मंडी में मौजूद आढ़तिए व्यवसायी सब्जियां खरीद लेते है । इस मामले में कई आढ़तिए भी किसानों का खुलेआम शोषण करने से बाज नहीं आ रहे । जानकारी के अनुसार दोपहर में मंडी में आने वाली सब्जियों के भाव ही नहीं खोले जाते । उन्हें शाम तक इंतजार करवाया जाता है । फिर जब शाम को जरूरत से ज्यादा सब्जियां आ जाती है तो आढ़तिए अपने हिसाब से औने पौने दाम तय करके किसान को उसी भाव में सब्जी बेचने पर मजबूर कर देते है । आपको बता दें कि मंडी के आढ़तिए फिर उन दामों में भी 2% कमीशन किसानों से वसूल करते है तो वही उसी सब्जी पर 8% कमीशन दुकानदारों से वसूलते है । इसे सीधे शब्दों में समझेंगे हो केवल किसानों से खरीदकर दुकानदारों के देने की एवज में टोटल 10% कमीशन आढ़तिए खुद रख लेते है ।
खास बात यह है कि मंडी के दुकानदार अपना 10% मुनाफा कमाने के बाद भी इतने सस्ते में खुदरा दुकानदारों को सब्जियां बेच रहे है । लेकिन जब मंडी से निकली वही सब्जी दुकानो में बिकने के लिए पहुंचती है तो उसके भाव दो से तीन गुना ज्यादा वसूले जा रहे है । एक और जहां सब्जियां उगाने वाला किसान आज भी कर्जे में डूबकर बेहद बुरी स्थिति में जीने को मजबूर है तो वही दूसरी और मेहनत मजदूरी करके अपना परिवार पालने वाला आम आदमी आसमान छूते दामों में सब्जियां खरीदकर इनके हाथों लूटने को मजबूर है । इन दोनों के बीच में असली चांदी कूटकर मालामाल हो रहे है वे दुकानदार जो बाजार में सब्जी बेच रहे है । इसलिए आज जरूरत है इन दुकानदारों पर सख्त सरकारी अंकुश लगाए जाने की । जिसके बाद ना सिर्फ इनका मुनाफा तय किया अजा सके बल्कि एक निश्चित रेट में ही सब्जियां बेचने के लिए इन्हें पाबंद भी किया जा सके । यदि इन पर अब भी अंकुश नहीं लगाया गया तो लुट का यह खेल आगे भी इसी तरह जारी रहेगा और आम नागरिक चाहकर भी अपने आपको लूटने से बचा नहीं पाएंगे ।

