Thursday, February 26, 2026
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हिम्मत बाजार में नहीं बिकती

मूकनायक/ देश

राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा

पनवाड़ी गाँव के निर्भीक बहुजन मिशन कार्यकर्ता भरत सिंह ने एक झटके में करोड़ो दलितों के मन और मस्तिष्क से भय को निकाल दिया। जालिमों ने बाबा साहेब की पुस्तक “हिन्दुत्व की “पहेली” को जलाया और उनकी मूर्तियां तोड़ी तो 6 लाख आन्दोलित बहुजनों ने बम्बई को घेरकर पुस्तक पर लगी रोक को हटवाया। अतः बिना संघर्ष के संगठित होना और बिना शिक्षित हुए संघर्ष करना असम्भव है।

जिस प्रकार गन्ने को पेरकर रस बनता है, रस को खौलाकर गुड़ बनता है तथा गुड़ से शक्कर बनती है, उसी प्रकार कठिन संघर्ष घोर अपमानों, तूफानों और जोखिमों को झेलकर बहुजन कैडर अम्बेडकरवादी बनता है, और इसी में से नेता अपने आप निकलता है। इनको जो छेड़ेगा या टकरायेगा वह मिट जायेगा।

दलित बहुजन शक्ति के समान दुनिया में कोई शक्ति नहीं है। इनका बदन लोहे के समान काला व कड़ा पड़ गया है तथा उन्हें जहरीले साँपों व खूनी चीतों को मारने की हत्तक पड़ गई है। बिना पीरा(पिला) हुआ गन्ना या तो सूख जाता है या उसमें कीड़े पड़ जाते हैं। संघर्ष के तीव्र तूफानों से बाबा साहेब मानवता के मसीहा बने। मनुवादी भारत में राम राज्य लाने पर आमादा हैं और इसीलिए उन्होंने देश का बँटवारा किया था। जिस रामराज्य में शूद्र शम्बूक की गर्दन काटने का विधान हो उसमें दलित व पिछड़े कैसे जिन्दा रह सकते हैं? जिस राज्य में एकलव्य का अंगूठा कटता हो उसमें आदिवासी कैसे जिन्दा रहेंगे ? जब रामराज्य में तथाकथित हिन्दुओं का यह हाल है तो मुसलमान, ईसाई और सिक्खों का क्या होगा ? रामराज्य में राजतंत्रीय संस्कृति की बहाली होगी जिसका अर्थ होगा सवर्णो का राज्य सवर्णों द्वारा सवर्णों के लिए।

स्वतंत्रता संग्राम में बहुजनों ने आत्म बलिदान किया, परन्तु आज भारत में सबको समानता देने के बजाए उन्नति के हर क्षेत्र में मनुवादी स्वयं कुण्डली मारकर बैठ गये। आज मनुवादी शासक वर्ग अपने स्वार्थ के कारण देश का दुबारा विभाजन करने पर तुला हुआ है। बहुजनों को उनके इन नापाक मंसूबों को संवैधानिक उपायों द्वारा नाकाम कर देना चाहिए।

संदर्भ पुस्तक:
बाबा साहब के तीन उपदेश और उनका सही क्रम
प्रो. डॉ रामनाथ (कानपुर)

🙏🙏🙏🅰️🅿️ निरिस्सरो
जय भीम जय भारत जय संविधान

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