न्यूज रिपोर्टर..राकेश कोठेनियां हलैना
दौसा .. (भरतपुर) जिले के कालिखाड़ में एक पिता जो पिछले दो दिनों से उस बोरवेल के पास बैठा हुआ था जिसके अंदर उसकी दुनिया थी, जीने की उम्मीद थी, उसका भविष्य था, उसका बेटा आर्यन था। हाथ में दूध की बोतल लेकर पूरी रात बैठा रहा और कहता रहा, मेरे बेटे को पता नहीं कब इसकी जरूरत पड़ जाये। जब बाप का ही ये हाल था तो फिर मां का कैसा होगा। मासूम आर्यन को घंटो की मेहनत के बाद बोरवेल से तो बाहर तो निकाल लिया गया पर उसकी जान नहीं बचा पाए। आर्यन के इस दुनिया से जाने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ मार्मिक पंक्तियां वायरल हो रही है जिसके बोल है कि “मैं मौत से लड़ा, खूब लड़ा, अपनी पूरी ताकत से, अपने हौसले से, हर पल जिंदगी के लिए जंग लड़ी लेकिन आप सबने देर कर दी। मैं हार गया, माफ करना। अब जा रहा हूं, पर एक वादा करता हूं, फिर आऊंगा, इन्हीं गलियों में, इन्हीं मैदानों में खेलूंगा, खिलखिलाऊंगा लेकिन इस बार जाते जाते एक गुजारिश कर रहा हूं कि खुले बोरवेलों को ढक देना। मैं फिर से उस काले अंधकार में नहीं जाना चाहता, जहां सिर्फ डर और अकेलापन है। मेरी हार को सबक बनाना ताकि कोई और मासूम इस तरह न हार सके”।

