मूकनायक
देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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धन जीवन का लक्ष्य नहीं, उसकी आवश्यकता है। स्वास्थ्य रहने पर आप धन अवश्य कमा सकते हैं, मगर धन रहते हुए भी स्वास्थ्य नहीं कमाया जा सकता है। धन साधन है, साध्य नहीं। धन अर्जित अवश्य किया जाए परंतु स्वास्थ्य की बलि देकर नहीं। धन कमाने के साथ-साथ उसका सही मार्ग में उपयोग करना भी हमको आना चाहिए।
जो धन अन्याय मार्ग में व्यय किया जाता है, वो हमारे अनिष्ट का कारण बन जाता है एवं जो धन परोपकार में खर्च किया जाता है, वो जीवन को यज्ञ के समान पुण्य लाभ प्रदान करने वाला भी बन जाता है। स्वास्थ्य को दाँव पर लगाकर कमाया गया धन भी जीवन में सुख का नहीं अपितु दु:ख का कारण बन जाता है ।
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

