Thursday, February 26, 2026
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मैं ऐसा नींव का पत्थर रखूंगा उस की पत्थर को मनुवादी लोग तक यह दुनिया है, हिला नहीं पाएंगे

मूकनायक / देश

राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा

💎 बनारस में जगतगुरु रविदास जी महाराज के नाम पर बने यादगार गेट के बारे में भी बड़ी दिलचस्प कहानी है। जब भी इस गेट का नींव पत्थर रखने की बात चलती थी तो कुछ मनुवादी राह में तरह-तरह के रोड़े लटकाने में लग जाते थे। पहले यह गेट मदन मोहन मालवीय गेट के बिल्कुल सामने बनना था पर साजिश के तहत कुछ लोगों ने विश्व हिंदू यूनिवर्सिटी में पढ़ते विद्यार्थियों से इस तर्क के अधीन हड़ताल करवा दी इस गेट पर चढ़कर कुछ शरारती तत्व लड़कियों के हॉस्टल में दाखिल हो सकते हैं। मनुवादी लोग रविदास महाराज के नाम पर बना हुआ गेट किसी भी सूरत में नहीं चाहते थे। आखिर संत सुरेंद्र दास राम ने पूरी समस्या बताई और साहिब से पूछा कि ऐसी सूरत में क्या करना चाहिए। साहिब ने कहा कि फ्रिक ना करो। मैं ऐसा नींव पत्थर रखूंगा कि रहती दुनिया तक उस गेट को मनुवादी लोग हिला तक नहीं पाएंगे। बिना वक्त गंवाए साहिब ने तत्कालीन राष्ट्रपति के. आर. नारायण (बाबासाहिब ने इस व्यक्ति को ऊंची शिक्षा के लिए विदेश भेजा था) के साथ फोन पर सम्पर्क किया और गेट की नींव पत्थर रखने के लिए तारीख मांगी। आगे से के आर नारायण साहिब ने देखकर कहा कि मेरे पास 10 – 11 महीने बाद की तारीख खाली है। तो साहिब ने कहा कि, चलिए आप 10 – 11 महीने बाद आकर गेट का उद्घाटन कर जाना, नींव का पत्थर मैं खुद ही रख लूँगा और इस तरह साहिब ने उस गेट का नींव पत्थर 26 मई 1997 को अपने ही हाथों से रख दिया।

नींव पत्थर रखने की देरी थी कि उत्तर प्रदेश के सारे प्रशासन के लिए मानो विपदा आन पड़ी। दरअसल गेट का उद्घाटन भारत के राष्ट्रपति ने करना था। उत्तर प्रदेश सरकार की कठोर हिदायतों के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस गेट के उद्घाटन तक टिकी रही ताकि गेट पर रखे नींव पत्थर को कोई नुकसान ना पहुंचा सके। यहाँ तक कि उद्घाटन करने के बाद भी उत्तर प्रदेश पुलिस गेट की सुरक्षा करती रही। आखिर कारीगरों ने दिन रात एक कर के तीनों शिफटों में काम जारी रखकर गेट का निर्माण ( क्योंकि उत्तर प्रदेश प्रशासन गेट के निर्माण के लिए टाइम बाउंड था) कर दिया। फिर 16 जुलाई 1998 को भारत के राष्ट्रपति के आर नारायणन ने सतगुरु रविदास जी महाराज की याद में निर्मित इस गेट का उद्घाटन किया। जिस दिन उद्घाटन होना था उस दिन संत रामानंद जी खुद जिप्सी चला कर साहिब को लखनऊ के एयरपोर्ट से गुरु रविदास मंदिर तक लेकर आए और कृष्ण नाथ डेरा चहेदू (फगवाड़ा) और संत सुरेंद्र दास बावा (रविदासिया धर्म प्रचार स्थान, काहनपुर) भी उनके साथ ही थे। इस अवसर पर साहिब कांशीराम के साथ साथ चोटी की राजनीतिक लीडरशिप, साधु संप्रदाय से संबंधित प्रमुख संत और यू.पी. और भारत के टॉप के प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे।

💎 समाजिक परिवर्तन ही मेरा सबसे बड़ा निशाना है-
:- मान्यवर साहिब कांशी राम
सन्दर्भ पुस्तक:
🗣️मैं कांशी राम बोल रहा हूँ….140*

🙏🙏🙏🅰️🅿️ निरिस्सरो
जय भीम जय कांशीराम
जय भारत जय संविधान

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