Thursday, February 26, 2026
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सेवा स्तंभ ने मनाया बाबा साहब का महापरिनिर्वाण दिवस

मूकनायक/हरियाणा

रेवाड़ी, राय सिंह –

——–सेवा स्तम्भ जिला इकाई एवं धम्म भूमि रेवाड़ी की ओर से अम्बेडकर चौक रेवाड़ी पर बाबा साहेब का 68वां महापरिनिर्वाण दिवस मनाया गया । इस अवसर पर मौजूद सभी साथियों ने बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर व कैंडल प्रज्वलित कर अपनी ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की ।सेवा स्तम्भ के प्रधान भगतसिंह सांभरिया ने अपने सम्बोधन में बताया कि भारतीय संविधान के निर्माता,समाज सुधारक, विश्व रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 69वीं पुण्यतिथि है | बाबा साहेब अंबेडकर ने छह दिसंबर 1956 को अंतिम सांस ली थी | आज का दिन”महापरिनिर्वाण दिवस” के रूप में मनाया जाता है | इस दिन पूरे देश में डॉ. अंबेडकर की याद में कई कार्यक्रम किए जाते हैं और सभी देशवासी व तमाम राजनीतिक दल बाबा साहब को शत-2 नमन् एवं श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं |डॉ. अंबेडकर ने सामाजिक छुआ-छूत और जातिवाद के खात्‍मे के लिए काफी आंदोलन किए | उन्‍होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, दलितों और समाज के पिछड़े वर्गों के उत्‍थान के लिए न्‍योछावर कर दिया | डाॅ अंबेडकर ने खुद भी उस छुआछूत, भेदभाव और जातिवाद का सामना किया है, जिसने भारतीय समाज को खोखला बना दिया था |जिला महासचिव आरपी सिंह दहिया ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ
भीमराव अंबेडकर का जन्म माता भीमाबाई और पिता रामजी मालोजी सकपाल के घर 14 अप्रैल 1891 को महू आर्मी कैंटोनमेंट, मध्य प्रांत (मध्य प्रदेश) में हुआ था। अंबेडकर के पिता भारतीय सेना में सूबेदार थे और 1894 में उनकी सेवानिवृत्ति के बाद, परिवार सतारा चला गया था।
भीमराव अम्बेडकर ने एल्फिंस्टन हाई स्कूल से मैट्रिक पास किया। 1908 में, अंबेडकर को एल्फिंस्टन कॉलेज में अध्ययन करने का अवसर मिला।
भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर 32 डिग्रियों के साथ 9 भाषाओं के सबसे बेहतर जानकार थे। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में मात्र 2 साल 3 महीने में 8 साल की पढ़ाई पूरी की थी।बाबा साहब मानते थे कि हिंदू धर्म में, विवेक, कारण, और स्वतंत्र सोच के विकास के लिए कोई गुंजाइश नहीं है | डाॅ अंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में एक औपचारिक सार्वजनिक समारोह का आयोजन किया. इस समारोह में उन्‍होंने श्रीलंका के महान बौद्ध भिक्षु महत्थवीर चंद्रमणी से पारंपरिक तरीके से त्रिरत्न और पंचशील को अपनाते हुए बौद्ध धर्म को अपना लिया | बाबा साहब डाॅ अंबेडकर डायबिटीज के मरीज थे | 6 दिसंबर 1956 को दिल्‍ली में उनका निधन हो गया था |महिला विंग अध्यक्षा मोनिका मेहरा ने बताया कि हालांकि डॉ. अंबेडकर एससी वर्ग को समानता दिलाने के जीवन भर संघर्ष करते रहे | उन्होंने इस समुदाय के लिए एक ऐसी अलग राजनैतिक पहचान की वकालत की जिसमें कांग्रेस और ब्रिटिश दोनों का ही कोई दखल ना हो | 1932 में ब्रिटिश सरकार ने अंबेडकर की पृथक निर्वाचिका के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी, लेकिन इसके विरोध में महात्‍मा गांधी ने आमरण अनशन शुरू कर दिया | इसके बाद अंबेडकर ने अपनी मांग वापस ले ली | बदले में एससी समुदाय को सीटों में आरक्षण और मंदिरों में प्रवेश करने का अध‍िकार देने के साथ ही छुआछूत खत्‍म करने की बात मान ली गई थी | एडवोकेट राजकुमार जलवा ने बताया कि
उन्होंने अछूतों के प्रति सामाजिक भेदभाव के खिलाफ और निचली जातियों के उत्थान के लिए काफी संघर्ष किया था |मैडम लक्ष्मीबाई लिसाना ने बताया कि डॉ. अम्बेडकर को मरणोपरांत, वर्ष 1990 में, भारत रत्न से सम्मानित किया गया | बाबासाहेब अंबेडकर, एक उच्च शिक्षित व्यक्ति, प्रोफेसर और शिक्षाविद, और एक अग्रणी वैश्विक विचारक थे। वे भारत के महानतम नेताओं में से एक थे |डाॅ अंबेडकर ने अपने जीवन में शिक्षा को सबसे अधिक महत्व दिया और उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही मनुष्य समृद्ध हो सकता है। सूबे सिंह रेवड़ियां ने बताया कि बाबा साहेब अंबेडकर का विचार था कि शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है और किसी को भी इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। एडवोकेट कमल निम्भल ने बताया कि बाबा साहब ने कहा था कि शिक्षा जितनी पुरुषों के लिए आवश्यक है उतनी ही महिलाओं के लिएभी जरूरी है।आज इस अवसर पर इनके अलावा सैकड़ो की संख्या में बाबा साहेब के अनुयायी एकत्रित हुए ,जिनमे मुख्य रूप से भगत सिंह सांभरिया, आर.पी सिंह दहिया , एडवोकेट राजकुमार जलवा,सूबे सिंह रेवाड़िया,सुमित रेवाड़िया,कमल निम्भल, ऐडवोकेट मोतीलाल नैनावत,होशियार सिंह अहरोदिया, मोनिका मेहरा, लक्ष्मीबाई लिसाना, नीरज लिसाना,रजनी आजाद ,सत्यप्रकाश रणबीर सिंह , रामनिवास गोठवाल, सत्यप्रकाश आदि काफी संख्या में साथी उपस्थित रहे आदि ।

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