Thursday, February 26, 2026
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बाबा साहब के 13 अनमोल विचार

मूकनायक/ देश

*राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा*

अम्बेडकर साहब के 13 अमुल्य विचार 1) मनुष्य नश्वर है उसी तरह विचार भी नश्वर हैं। एक विचार को प्रचार-प्रसार की जरूरत होती है जैसे एक पौधे को पानी की नहीं तो दोनों मुरझाकर मर जाते है। 2) पति-पत्नि के बीच का संबंध घनिष्ठ मित्रों के संबंध के समान होना चाहिए। 3) हिन्दूं धर्म में विवेक कारण और स्वतंत्र सोच के विकास के लिए कोई गुंजाइश नहीं है। 4) जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है वो आपके किसी काम की नहीं। 5) यदि हम एक संयुक्त एकीकृत आधुनिक भारत चाहते है तो सभी धर्मो के शास्त्रों की संप्रभुता का अंत होना चाहिए। 6) जीवन लंबा होने की बजाए महान होना चाहिए। 7) कानून और व्यवस्था राजनीतिक शरीर की दवा है और जब राजनीतिक शरीर पड़े तो दवा जरूर दी जानी चाहिए। 8) एक महान आदमी एक प्रतिष्ठित आदमी से इस तरह से अलग होता है कि वह समाज का नौकर बनने को तैयार रहता है। 9) में ऐसे धर्म को मानता हूं जो स्वतंत्रता समानता और भाईचारा सिखाए। 10) हर व्यक्ति जो मिल के सिद्धांत कि एक देश दूसरे देश पर शासन नहीं कर सकता को दोहराता है उसे ये भी स्वीकार करना चाहिए कि एक वर्ग दूसरे वर्ग पर शासन नहीं कर सकता। 11) इतिहास बताता है कि जहां नैतिकता और अर्थशास्त्र के बीच संघर्ष होता है वंहा जीत हमेशा अर्थशास्त्र की होती है।निहित स्वार्थौं को तब तक स्वेछा से नहीं छोड़ा गया है जब तक मजबूर करने के लिए पर्याप्त बल न लगाया हो। 12) बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए। 13) समानता एक कल्पना हो सकती है लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निग सिद्धांत रुप में स्वीकार करना होगा। भारत के संविधान निर्माता बाबासाहेब डाॅ.अम्बेडकर।

लेखक : मदनलाल ,सामाजिक चिंतक ,वरिष्ठ पत्रकार और जिला ब्यूरो पाली मूकनायक

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