मूकनायक
देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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इंसान ना कुछ “हंस” कर सीखता है, ना कुछ “रो” कर सीखता है । इंसान जो कुछ भी सीखता है, वह या तो किसी का “होकर” सीखता है या फिर किसी को “खो” कर सीखता है। जीवन की हर समस्या के भीतर एक उपहार छुपा होता है । इसीलिए जो समस्या आए तो निराश मत होइए । उसका अंत आपकी उम्मीदों से सुंदर हो सकता है।
परिणाम जो भी हो, प्रयास बेहतरीन होना चाहिए। याद रखना “सहयोग” वह अनमोल तोहफा है, जो देने में भी अच्छा लगता है और मिले तो भी अच्छा लगता है । बाकी:- ताज्जुब की बात ये है कि जो लोग पूरे हफ्ते कुछ नहीं करते, वो लोग भी रविवार को रेस्ट करते हैं ।
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

