मूकनायक
देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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इंसान के मन में लग्न और चाह हो तो राह अँधेरे में भी दिख जाती हैं। हालांकि कुछ रिश्ते जिस हाल में हैं, उन्हें उसी हाल में छोड़ देना बेहतर है क्योंकि कभी-कभी उन्हें ज्यादा संभालने में हम खुद ही बिखरने लगते हैं। जीवन की सबसे बड़ी ग़लती वहीं होती है, जिस गलती से हम कुछ सीख नहीं पाते ।
वहीं ऐसे भी कह सकते हैं कि हमारी सबसे बड़ी गलतियों में से एक ये भी है कि हम खुद को बेहतर बनाने की जगह, खुद को बेहतर दिखाने में लगे हुए हैं बाकी -मूर्ख को मत सुधारों, नहीं तो वो आपसे वैर करेगा। एक बुद्धिमान व्यक्ति को सुधारों, वो आपका दिल से आभार व्यक्त करेगा ।
लेखक:
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

