मूकनायक /देश
“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”
बेवक्त याद आती है जुबान पर
वक्त पर जिन्होंने लुटा दी जवानी।
भुला कर भी भूल नहीं सकती
ऐसी छोड़ गया जिंदा निशानी।
दिन तो कट जाते हैं कटते नहीं
लमहे गुजारी थी जो रातें सुहानी।
कभी पैर रखा नहीं था जमीन पर
आसमानों पर उड़ने की थी ठानी।
सच मानकर दुनिया चलती रही
बेनकाब अनृत निकली कहानी।
बच कर चल रहीं हूं अब जमाने से
कमेला में उलझी गर्दन हैं बचानी।
चाहत की कोह में समागई जिंदगी
वतन पे मिटने की थी जो दीवानी।
हर वक्त अब बेवक्त सा लगता है
एक दिन सांसो में आनी है रवानी।
✍️ लेखक:
आशाराम मीणा उप प्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक कोटा राजस्थान।
🙏
जय भारत।
जय सविधान।
जय विज्ञान।

