Thursday, February 26, 2026
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“वीरांगना बहुजन नायिक रानी झलकारी बाई कोरी”

मूकनायक /देश

“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”

जन्म 22 नवंबर 1830
मृत्यु 4 अप्रैल 1890

1857 की जंगे आजादी कि बहुजन महानायिका ।महान देशभक्त वीरांगना। महान क्रांतिकारी झलकारी बाई कोरी जो गोरों से लड़ना सिखा गई। झलकारी बाई और रानी लक्ष्मीबाई का गहरा नाता रहा है ।जातिवाद का दंश झेल कर भी अपनी श्रेष्ठता साबित की ।वह रानी लक्ष्मी बाई की हमशकल थी। जिस कारण अंग्रेज धोखा खा जाते थे ।लक्ष्मी बाई के वेश में झलकारी बाई ने कई युद्ध किए और शत्रुओं को पराजित किया। वह रानी की प्रिय सहेली थी।
जन्म 22 नवंबर 1830 को झांसी के समीप भोजला नामक गांव में कोरी परिवार में हुआ था। बचपन से ही साहसी ,दृढ़ ,प्रतीक बालिका थी ।जंगल में उसने कुल्हाड़ी से एक बाघ को मारा था और डकैतों को भी अपने गांव से मुकाबला कर के भगा दिया था।
ब्रिटिश जनरल हायूग रोज से अकेले मिलने पहुंच गई थी ।जनरल भी नहीं पहचान पाया हमशक्ल होने की वजह से ।जनरल ने उसे पकड़कर पूछा कि तुम्हारे साथ क्या किया जाए तो हिम्मत करके कहा कि मुझे फांसी दे दो। ऐसी थी वीरांगना रानी झलकारी बाई कोरी।
लेकिन एक युद्ध के दौरान वह शहीद हो गई। तब जनरल ने कहा था कि अगर 1% महिलाएं भी उसके जैसी हो जाएं तो ब्रिटिश को जल्दी ही भारत छोड़ना पड़ेगा।
लेकिन उसकी जिंदगी पर एक भी फिल्म नहीं बनाई गई ।बहुजन नायिका झलकारी बाई कोरी जी के इस बलिदान को इतिहासकारों ने भी नजरअंदाज कर दिया। लेकिन बुंदेलखंड के लोगों के जेहन में आज भी उनकी याद में लोकगीत गुनगुनाते आज भी सुने जाते हैं।
खूब लड़ी मर्दानी, वह तो सही मायने में वीरांगना झलकारी बाई थी।
बुंदेलखंड के एक एक इंसान के जेहन में झलकारी बाई की वीरता के किस्से बसे हुए हैं ।
हम झलकारी बाई को दिल से नमन करते हैं।

लेखक: सामाजिक चिंतक

मोती राम MA
पूर्व अधिकारी
SHAHDARA

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