मूकनायक/ देश
“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”
समाज की एकता पर गौतम बुद्ध ने बड़ा ही अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया है। एक दिन तथागत गौतम बुद्ध शिष्यों के साथ रास्ते से गुजर रहे थे। शिष्यों ने देखा की आगे एक गड्ढा मिला जिसमें नर कंकाल पड़े थे। शिष्यों ने पूछा प्रभु यह क्या है। बुद्ध ने कोई उत्तर नहीं दिया ।थोड़ा आगे फिर चले वही दृश्य गड्ढे में नर कंकाल पड़े मिले तो शिष्यों ने फिर पूछा कि प्रभु यह सब क्या है। तब गौतम बुद्ध ने कहा कि इन लोगों को प्यास लगी थी। इन लोगों ने अलग-अलग कुआं खोदना चाहा। यह लोग अलग-अलग कुआं खोदने गए और कुआं खोदते ही मर गए। ना तो इन्हें पानी मिला और ना प्यास बुझी। और कुआं खोदते-ही मर गए।
अगर यह लोग एक साथ कुआं खोदते तो पानी भी मिलता और मरते भी नहीं और प्याज भी बुझती और शक्ति भी कम लगती प्यास भी बुझती और जिंदा भी रहते।
आज ठीक उसी प्रकार समाज के अलग-अलग लड़ रहे हैं और अपनी शक्ति नष्ट कर रहे हैं ।जिससे हमारी समस्या का खत्म होने के बजाय बढ़ती जा रही है। हर एक रोज एक नई पार्टी बना रहे हैं ।नए संगठन बना रहे हैं। जिससे शक्ति बढ़ने के बजाय शक्ति नष्ट हो रही है। समाज को अगर बढ़ाना है, समाज की शक्ति बढ़ाना है तो हर एक को, एक के दुख सुख में साथ देना चाहिए। और सबको मिलजुल कर बैठना चाहिए। तभी समस्या का समाधान निकाल सकता है।
इसीलिए कहा गया है की एक साथ मिलकर लड़ो अन्यथा वही हाल होगा जो कुआं खोदने वालों का हुआ था।
लेखक: सामाजिक चिंतक
मोती राम MA
SHAHDARA
9910160521

