Thursday, February 26, 2026
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अज्ञान और अंधविश्वास से बढ़कर दुनिया में कोई अंधेरा नही, शिक्षा से बढ़कर कोई उजाला नहीं

मूकनायक/ देश

“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”

शिक्षा के दम पर भारत ने हर जगह झंडे गाड़ दिए हैं। हर विदेशों में भी सफ़लता हासिल की हैं। देश आगे बढ़ रहा है, तो समाज भी आगे बढ़ रहा है।
महिलाएं भी पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर रही हैं। ये सब संभव हो पाया है सिर्फ और सिर्फ शिक्षा के दम पर।पर मुझे बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है की जितनी तरक्की हमने एजुकेशन और साइंस के नाम पर की हैं। उतनी ही तेजी से हम शिक्षित होकर भी अंधविश्वास और पाखंडवाद की ओर बढ़े हैं।

एक और तो हम शिक्षित होकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं , ओर विज्ञान में सफलता हासिल कर रहे हैं , और फिर पढ़े लिखे होकर भी अंजान बन रहे हैं।
कर्म को प्रधानता न देकर अंधविश्वास और अज्ञान को बढ़ावा दे रहे हैं। खासकर हमारे समाज की जो महिलाएं हैं , वो तो बहुत ज्यादा ही बढ़ावा दे रही है इन सभी चीजों को।
इसका असर ये होता है की घर के जो बच्चें होते हैं, उन पर भी इस अंधविश्वास और पाखंडवाद का सबसे ज्यादा असर पड़ता है। यही बच्चें बड़े होकर इन्ही चीजों को और भी बढ़ावा देते हैं।

कहने का अभिप्राय ये है कि एक पीढ़ी का अंधविश्वास दूसरी पीढ़ी की परंपरा बन जाती हैं। फिर से वही सब दोहराया जाता है। ये शुरु से ऐसे ही चलता आ रहा है।

किसी ने भी ठीक से इन सभी चीजों को जानने की कोशिश नहीं की। बस बड़ों ने मान लिया , तो हमने भी उनकी इन दकियानुशी बातों को अपने सिर पर ठान लिया जैसी स्थिति पैदा हो जाती हैं।
जरूरी नहीं होता है कि जो हमारे बड़े कर रहे हैं, वहीं हम भी करें। मैं अपने या आपके बड़ों के खिलाफ नहीं हूं, ओर ना ही मेरी ऐसी कोई प्रतिक्रिया हैं , मैं बस इस बार को तवज्जों देना चाहती हूं कि पहले जब हमारे बड़े बुजुर्ग होते थे तो शिक्षा का इतना बड़ा पैमाना नहीं होता था, या यूं कहे की विज्ञान और शिक्षा ने इतनी तरक्की नहीं की थी। पर आज तो बीहम सब मिलकर काम कर रहे हैं।
तो हमें शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए ताकि हम तरक्की कर सके, ना कि पांखण्डवाद को बढ़ावा देना चाहिए।

हमें शिक्षित होकर देश और समाज को आगे ले जाना चाहिए नाकि अज्ञान और अन्धविश्वास को बढ़ावा देना चाहिए।साथ ही साथ हम सबका फर्ज बनता है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को इसमें शामिल ना करें, उन्हें एक नए मुकाम पर लेकर जाए , या यूं कहें कि उन्हें हम तरक्की और कर्म प्रधानता की ओर लेकर जाए।

जय भीम जय संविधान
🙏👑💙🌹

लेखक: सामाजिक चिंतक ,नीलम सोनीपत, हरियाणा, जिला बरो चीफ मूकनायक

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