Thursday, February 26, 2026
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समतामूलक सर्वोच्च संविधान, नजर और नजरिया अपना अपना

मूकनायक/ देश

*राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा*

. समतामूलक संविधान सर्वोच्च
नज़र और नजरिया अपना-अपना।
अपने-अपने नजरिए की सबको स्वतंत्रता।
पर हकीकत है कि विश्व रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के अथक संघर्ष के फलस्वरूप मिले समतामूलक संविधान ने सदियों से गुलामीं का बदतर जीवन जी रहे वर्ग को अधिकार सम्पन्नता के साथ स्वतंत्र जीवन जीने के मार्ग पर अग्रसर किया है।
संविधान व्यक्ति के मौलिक अधिकारों को संरक्षित करते हुए व्यक्ति को अपनी सर्वांगीण उन्नति के समान अवसर सुलभ करवाता है। संविधान, व्यक्ति को उसकी आर्थिक, शैक्षिक , बौद्धिक क्षमता प्रतिभा को रेखांकित करने के समान अवसर प्रदान करता है।
वर्ण-व्यवस्था के तहत व्यक्ति को अपनी सर्वांगीण उन्नति के समान अवसर सुलभ नहीं होने के कारण व्यक्ति अपनी प्रतिभा को रेखांकित करने से वंचित रहा।
अतः यह हकीकत है कि व्यक्ति की सर्वांगीण उन्नति का मूल आधार समतामूलक संविधान है।
सदियों से प्रताड़ित रहे समाज को सर्वांगीण उन्नति के लिए संविधान में विशेष आरक्षण का प्रावधान किया गया ताकि आर्थिक, शैक्षिक बौद्धिक सामाजिक स्थिति से कमजोर वर्ग मुख्य धारा में आ सके।
यदि अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग को संवैधानिक आरक्षण नहीं होता तो सामान्य वर्ग में शायद 1% ही अपनी प्रतिभा को रेखांकित कर पाते।
राजकीय सेवाओं में अनुसूचित जाति/जनजाति के 99% कार्मिकों का चयन समाज को मिले संवैधानिक आरक्षण के जरिए हुआ है।
संवैधानिक आरक्षण अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग को मिला है किसी व्यक्ति विशेष को नहीं।
समाज को मिले संवैधानिक आरक्षण के कारण ही अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्ति को अपनी बौद्धिक प्रतिभा को रेखांकित करने का अवसर मिल पाया है।
भले ही व्यक्ति प्रतिभावान हो यदि व्यक्ति को अपनी प्रतिभा रेखांकित करने के अवसर ही सुलभ न हों तो प्रतिभा की कोई उपादेयता नहीं रह जाती।
संवैधानिक आरक्षण का मन्तव्य अनुसूचित जाति/ जनजाति वर्ग की आर्थिक, शैक्षिक व सामाजिक स्थिति में सुधार लाना है।
शासन -प्रशासन में वंचित वर्ग को बतौर प्रतिनिधित्व आरक्षण दिया गया है ताकि अनुसूचित जाति/जनजाति के संवैधानिक हक अधिकारों की हिफाजत व हितकारी योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन में पारदर्शिता के साथ अनुसूचित जाति/जनजाति की भागिदारी हो सके।
अतः अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग शासन-प्रशासन में बतौर प्रतिनिधि के पदस्थापित अपने कार्मिकों से अपेक्षा रखता है कि सदियों से वंचित समाज को मुख्य धारा में लाने के लिए कार्मिक सकारात्मक प्रयास करेंगे।
इस अपेक्षा के साथ ही‌ अवरोधों से निजात पाने के लिए आवश्यकता होने पर समाज के प्रतिभावानों की प्रतिभा को भी संविधान व समाज संरक्षण प्रदान करते हैं।
अत: समतामूलक संविधान व समाज, व्यक्ति के लिए सर्वोच्च स्थान रखते हैं।
समतामूलक संविधान व समाज को सर्वोच्च रखते हुए शासन-प्रशासन में बतौर प्रतिनिधि के पदस्थापित कार्मिक, प्रबुद्ध शिक्षित वर्ग विभिन्न सामाजिक संगठनों के जरिए वंचित समाज में शैक्षिक आर्थिक सामाजिक चेतना लाने हेतु सकारात्मक प्रयास कर रहे हैं।
अनुसूचित जाति/जनजाति के प्रबुद्ध शिक्षित लोग
” पे बैक टू सोसायटी” के अपने दायित्वों का क्षमतानुसार निर्वहन कर रहे हैं। और करना भी चाहिए।
समाज के प्रबुद्ध शिक्षित मनीषियों द्वारा दिए गए योगदान एवं प्रयासों के अनुरूप ही समाज की स्थिति बन पायेगी।
आज की विकट परिस्थितियों में समतामूलक संविधान की अक्षुण्णता हेतु अनुसूचित जाति/ जनजाति को मिलकर दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा।
सादर जय भीम
लेखक:स्वतंत्र चिन्तक –
पूरण मल गोठवाल झाड़ली
प्रदेश संयोजक
मानवतावादी विश्व सेवा परिषद संस्थान
राजस्थान प्रदेश

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