मूकनायक
देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जिंदगी का दूसरा नाम परिवर्तन है। अब चाहे वो परिर्वतन आप में हो, आपके रिश्तों में हो, आपके काम में हो या संसार में हो !! उसे अपनाना सीखें। कहते हैं कि चंदन वृक्ष की संगति से सामान्य वृक्षों में सुगंध आने लग जाती हैं और दूध की संगति से पानी का भाव बढ़ जाता है।
इसी प्रकार से जीवन में आपका परिवेश, आपका संग, आपका समाज, आपके जीवन को मूल्यवान अथवा निर्मूल्य बना देता हैं। पवित्र जीवन के लिए पवित्र विचार एवं पवित्र विचारों के लिए पवित्र परिवेश का होना अति आवश्यक है। याद रखें वाणी के बजाय कार्य से दिए गए उदाहरण कहीं ज्यादा प्रभावी होते हैं।कोरा उपदेश भी तब तक कोई काम नहीं आता, जब तक उसे चरितार्थ ना किया जाए..
लेखक:
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

