मूकनायक
देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन में सच्चा सुख तब मिलता है, जब इंसान अपना अहंकार त्यागकर मधुरता से भरे सुवचन बोलता है और इसका अनुसरण जीवनभर करता है। यह एक ऐसी कला है जो धीरे-धीरे सीखने पर जीवन में नियमित आदत भी बन जाती है। जब हम अपने अहंकार, क्रोध व आवेश पर नियंत्रण रखते हुए मधुर वाणी का प्रयोग करते हैं तो ऐसा करने से आप ना केवल अपने भविष्य को निखारते हैं, बल्कि दूसरों के जीवन में भी सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
मधुर वाणी का प्रयोग इतना शक्तिशाली होता है कि वह कठोर ह्रदय को भी पिंघला देता है। दूसरी ओर कटु शब्दों का प्रयोग हमारी अपनी वाणी को दूषित करता है और सामने वाले व्यक्ति को भी कष्ट पंहुचाता है। ऐसा करके हम स्वयं को भी कमजोर बनाते हैं जिसके फलस्वरूप मधुरवाणी अपनाकर आनंदमय जीवन का लुत्फ उठाना ही हितकारी है ।
लेखक:
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी, मूकनायक, हरियाणा

