मूकनायक राजस्थान अजमेर कालू राम बैरवा
19 नवंबर 1942 को आज ही के दिन केकड़ी के सेठ लाभचंद राजगढ़िया ने अपने पिताजी की स्मृति में 14600 रूपये खर्च कर बनवाया था पुष्कर हॉस्पिटल •••
केंद्र सरकार द्वारा काशी , उज्जैन , अयोध्या में भव्य कॉरिडोर बनाकर इन तीर्थ नगरीयो के आध्यात्मिक स्वरूप को बढ़ावा देने के पश्चात बीते कुछ महीनों से अब पुष्कर तीर्थ में भी ब्रह्मा मंदिर कॉरीडोर बनाने की दिशा में युद्ध स्तर पर प्रयास जारी है । हालांकि ब्रह्मा मंदिर कॉरीडोर का स्वरूप कैसा होगा , वह कितने बड़े एरिए में होगा , उसमे क्या क्या सुविधाएं दी जाएगी इस बात का अभी सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया गया हैं। लेकिन अंदर खाने प्रशासनिक स्तर पर राज्य सरकार द्वारा इसे अंतिम रूप दिए जाने का कार्य तेज गति से चल रहा है । अभी हाल ही में कार्तिक पुर्णिमा के अवसर पर पुष्कर पहुंची उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी सिंह ने भी इसे लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ लंबी चर्चा की और कॉरिडोर को लेकर बनाया जा रहा लेआउट प्लान देखा । में कोई कॉरिडोर बनाने का विरोधी नहीं हूं लेकिन राज्य सरकार का ध्यान पुष्कर की सबसे बड़ी और सालो पुरानी समस्या की और जरूर आकर्षित करवाना चाहता हूं । इस वक्त पुष्कर तीर्थ को कॉरिडोर से ज्यादा 100 बेड के एक अत्याधुनिक हॉस्पिटल की दरकार है जहां इलाज पाने वाले किसी मरीज की जान बचाई जा सके । जिसे बनाए जाने के लिए अब यहां के राजनेताओं और यहां कार्यरत अधिकारियों को मजबूत इच्छा शक्ति दिखानी ही होगी ।
# 82 सालो से एक ही बिल्डिंग में चल रहा है हॉस्पिटल, मरीजों की तो छोड़ो आज डॉक्टर्स के बैठने के लिए भी जगह नहीं •••
आपको बता दें कि इस हॉस्पिटल का निर्माण 82 साल पहले ठीक आज ही के दिन 19 नवंबर 1942 को केकड़ी के सेठ लाभचंद राजगढ़िया द्वारा अपने स्वर्गीय पिताजी सेठ नागरमल जी राजगढ़िया की स्मृति में करवाया गया था । खास बात यह है कि इस बिल्डिंग को बनवाने में उस समय 14 हजार 600 रुपए खर्च किए गए थे । उस जमाने के हिसाब से यह उस वक्त का सबसे अच्छा हॉस्पिटल बनाया गया था लेकिन अब जब कि इसे बने हुए आज 82 साल हो चुके है । इसीलिए आज यहां आनेवाले मरीजों को हर चीज की परेशानी झेलनी पड़ रही है । इस हॉस्पिटल की हालत आज किसी से भी छुपी हुई नहीं है । यहां केवल नर्सिंग स्टाफ और कुछ डॉक्टर्स के अलावा कुछ भी बुनियादी सुविधाएं मौजूद नहीं है । आज पुष्कर में रहने वाले लोगों की संख्या तीस हजार से ज्यादा की हो चुकी है । साथ ही पुष्कर के पेराफेरी क्षेत्र में तीस से ज्यादा गांव आते है । वहां रहने वाले हजारों ग्रामीण भी इसी हॉस्पिटल में इलाज करवाने आते है । यही वजह है कि हर रोज यहां 800 से 1000 लोग ओपीडी में डॉक्टरों को दिखाने पहुंच रहे है । लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि आज यहां पर 20 मरीजों के बैठने के लिए भी व्यवस्था नहीं है । यहां तक कि मरीजों की तो छोड़ो डॉक्टर्स के बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है । हालात यह है कि एक एक कमरे में तीन तीन डॉक्टर बैठने को मजबूर है । जिन्हे दिखाने वाले मरीज लंबी लाइन में खड़े खड़े बेहाल हो रहे है ।
राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी के चलते आज आलम यह है कि यहां पर न मरीजों के बैठने की व्यवस्था है तो न ही मरीजों के लिए अत्याधुनिक बेड , इलाज के लिए ट्रॉलियां , वार्ड में ऑक्सीजन , पंखे , ए सी , और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं , कुछ भी उपलब्ध नहीं है । यहां तक कि हॉस्पिटल के बाहर गाड़ी पार्क करने की जगह तक नहीं है । दिनभर बेतरतीब तरीके से लोग अपनी गाड़ियां खड़ी करके रास्ता अवरुद्ध कर देते है । इसके अलावा हालत यह है कि हॉस्पिटल में सीबीसी जांच , सोनोग्राफी , एक्सरे , ईसीजी मशीन, निमोलाइज मशीन , ब्लड प्रेशर नापने जैसी मशीने भी भामाशाहों के सहयोग से उपलब्ध करवाई गई है । यहां तक कि पूरी तरह से जर्जर हो चुकी इस बिल्डिंग में पिछले कई सालों से रंग रोशन तक नहीं किया गया है ।
बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक पुष्कर सहित आसपास के ग्रामीण इलाको के हजारों लोग एवं पुष्कर आने वाले हजारों देशी विदेशी पर्यटक इस जर्जर हो चुकी हॉस्पिटल बिल्डिंग में अपना इलाज करवाने का जोखिम उठाते रहेंगे । आम लोगो को जीवन देने वाला हॉस्पिटल आज खुद वेंटिलेटर पर पहुंच चुका है । इसलिए आज पुष्कर को ब्रह्मा मंदिर कॉरीडोर बनाए जाने से ज्यादा जरूरत एक अत्याधुनिक हॉस्पिटल बनाए जाने की है । जहां आम लोगो का इलाज हो सके , उन्हें इलाज के लिए अजमेर या फिर वहां के निजी हॉस्पिटल के चक्कर नहीं लगाने पड़े । खास बात यह है कि आज के समय में पुष्कर के राजनैतिक नेतृत्व सबसे ज्यादा मजबूत स्थिति में है । इनकी पहुंच सीधे मुख्यमंत्री तक है । यहां के विधायक सुरेश सिंह रावत जहां केबिनेट मंत्री बनकर सरकार का अहम हिस्सा है तो वही पुष्कर नगर परिषद के सभापति कमल पाठक भी सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंच रखते है । ऐसे में सभी राजनेताओं द्वारा पुष्कर की जनता को हॉस्पिटल की सौगात देने के सामूहिक प्रयास जरूर किए जाने चाहिए ।

