Tuesday, September 29, 2026
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मर्यादापूर्वक जीवन जिएंगे तो दुविधाओं और तबाही से रहेंगे बचे

मूकनायक
देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा

✍🏻 जब जब समुद्र अपनी मर्यादा तोड़ता है तो चक्रवात के कारण वह भारी तबाही मचाता है। ठीक इसी प्रकार इंसान के जीने के लिए भी मर्यादाओं की लक्ष्मण रेखाएं निर्धारित हैं। उन रेखाओं का हम जब भी अतिक्रमण करते हैं, तब-तब हमारे अस्तित्व का अपहरण ही होता है। जैसे कि- घर की मर्यादा, जीवन की मर्यादा, कुल की मर्यादा, समाज की मर्यादा, देश और संस्कृति की मर्यादा।
मर्यादा बंधन नहीं, अपितु निर्मल और व्यवस्थित जीवन जीने की शैली है। समुद्र बड़ा होता है और बांध छोटा, परंतु जब तक समुद्र अपनी मर्यादा में है, तब तक उससे कोई खतरा नहीं है, परंतु बांध छोटा होकर भी अगर मर्यादा तोड़ बैठे तो बड़ी तबाही ले आता है । इसलिए मर्यादापूर्वक जीवन जिएंगे तो हजार दुविधाओं और तबाही से बचें रहेंगे।
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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