Thursday, February 26, 2026
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एडवोकेट भगवान दास वाल्मीकि की पुण्यतिथि पर विशेष

मूकनायक

राजस्थान/ अजमेर

कालू राम बैरवा

एडवोकेट श भगवानदास
बाल्मीकि परिवार से ।
जन्म 23 अप्रैल 1927
मृत्यु 18 नवंबर 2010

    एडवोकेट भगवान दास का जन्म जातोंग केंट शिमला हिमाचल प्रदेश में SC समाज में भंगी परिवार में हुआ था।
  भगवानदास  समाज सुधार के अनेक पुस्तकों के लेखक और 500 के करीब लेख, लघु कथाएं जो पेपर में छपी थी ।बौद्ध धर्म का प्रचार भी किया और बाद में उन्होंने बौद्ध धर्म अपना भी लिया था।
    हिंदुओं ने 19वीं सदी के आखरी दशकों में जनगणना में मुसलमानों के मुकाबले हिंदुओं की जनसंख्या कम हो जाने के डर से, अछूतों को बेवकूफ बनाने के लिए हिंदुओं ने हिंदू धर्म का प्रचार शुरू कर दिया। इसी प्रोपेगेंडा के प्रभाव में आकर पंजाब की चूहड़ा जाति के लोगों ने अपनी जाति का नाम बाल्मीकि लिखना शुरु कर दिया। इस चक्कर में उनकी मानसिक ,राजनीतिक, आर्थिक तथा सामाजिक उन्नति रुक गई।
    भगवान दास  ने अपनी किताब ,,,मैं भंगी हूं,,,, भंगी जाति के उद्धार के लिए उन्हें बहुत समझाया। उनके विकास के रास्ते बताएं। भंगी से बाल्मीकि बनने के प्रॉप गंडा से बचने की सलाह दी। लेकिन अमी चंद्र  शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक,,, बाल्मीकि प्रकाश ,,,और पंजाब के बाल्मीकि सोशल वर्कर पंडित बक्शी राम के बाल्मीकि चमत्कार और इलाहाबाद के बद्री प्रसाद के वाल्मिक पुस्तक के द्वारा भंगी जाति को वाल्मीकि जाति में जोड़ने में सफल हो गए।
   भगवानदास बाल्मीकि भंगी से बाल्मीकि नामकरण के षड्यंत्र को अपनी पुस्तक 

मैं भंगी हूं मैं लिख कर उजागर करने वाले सच्चे अंबेडकरवादी की कोशिश कामयाब नहीं हुई।
फैज अहमद फैज प्रसिद्ध उर्दू शायर ने मजदूर, दलित ,बाल्मीकि की स्थिति को सामने रखकर लिखी प्रसिद्ध नजम, मैं मजदूर वर्ग की छुपी शक्ति इशारा करते हुए कहा है की,,,
कोई उनको एहसास ए जिल्लत दिला दे।

    कोई उनकी सोई हुई दुम हिला दे।

    भगवान दास  कहते हैं मैंने सोई हुई दुम हिलाने की कोशिश ही नहीं की बल्कि एक आशा ,एक आदर्श ,एक लक्ष्य भी उनके सामने रखने का प्रयास किया। लेकिन भंगी बाल्मीकि बनने के चक्कर में हिंदू लोग अपने षड्यंत्र में कामयाब हो गए। जबकि भगवान दास  ने ,,मैं भंगी हूं ,,,मैं लिखकर उजागर किया है कि भंगी वाल्मीकि कैसे बने, उन्होंने छुआछूत और अत्याचार के खिलाफ समाज को जागृत करने के लिए एक लंबी लड़ाई लड़ी।
डॉक्टर अंबेडकर ने उनकी काबिलियत देखकर जब पहली बार वह शिमला में मिले थे। उन्हें एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी देकर उन्हें शेड्यूल कास्ट फेडरेशन का सदस्य बनाया था और मरते दम तक समाज सुधार का कार्य करते रहे। बाबा के परम शिष्य ने सफाई कर्मचारी पर चार पुस्तक लिखी। और एक पुस्तक धोबी जाति पर लिखी।
     दलित जातियों के इतिहास का दस्तावेज में लिखा कि अगर मार्क्स ने दुनिया के मजदूरों को एक होने का  आवान किया तो भगवान दास ने भारत में और एशिया में दलितों को एक होने का संदेश दिया था। दलित मसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया था।
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