मूकनायक / राजस्थान
धौलपुर से रामदास तरुण की प्रमुख रिपोर्ट
सरमथुरा उपखंड में अधिकतर शादी – विवाह में महिलाओं को ट्रॉली में यात्रा के दौरान जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, वह न केवल उनके शारीरिक कष्टों को बढ़ाता है, बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरे का कारण बनता है। ट्रॉली, जो आमतौर पर पत्थर, अनाज की बोरियों, लकड़ी और घास जैसे सामान को ढोने के लिए उपयोग की जाती है, उसमें महिलाओं को बैठने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं होती। वहाँ ना तो गद्दा होता है, और ना ही कोई अन्य सुविधा जो उनकी यात्रा को आरामदायक बना सके। इस स्थिति में महिलाओं को असुरक्षित महसूस करना स्वाभाविक है। इतना ही नहीं, ट्रैक्टरों को तेज़ गति से चलाया जाता है, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम और भी बढ़ जाता है। इस प्रकार की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, जिनमें कई महिलाओं को गंभीर चोटें आई हैं। इसके बावजूद, इस मुद्दे पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखते हुए, यह जरूरी है, कि महिलाओं की कद्र की जाए और उनकी यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। महिलाओं को ट्रॉली में यात्रा करते समय न्यूनतम मूलभूत सुविधाएं, जैसे गद्दे और सुरक्षा उपकरण, उपलब्ध कराए जाने चाहिए। साथ ही, ट्रैक्टर की गति पर नियंत्रण भी जरूरी है, ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके। इस दिशा में ठोस कदम उठाना समय की आवश्यकता है।

