मूकनायक
राजस्थान /धौलपुर
रामदास तरुण तरुण की प्रमुख रिपोर्ट
धौलपुर के सरमथुरा उपखंड की ग्राम पंचायत पबेनी के गांव खिन्नोट में आज सफाई अभियान की शुरुआत हुई, जो लंबे समय से लंबित थी। यह सफाई अभियान पांच वर्षों से लगातार शिकायतों और अधिकारियों की अनदेखी के बाद शुरू हुआ। समाजसेवी रामेश्वर दयाल ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली को मेल भेजकर गांव की गंदगी और सफाई की स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद मानव अधिकार आयोग ने जिला मजिस्ट्रेट को सफाई कार्य शुरू करने के निर्देश दिए, जिसके परिणामस्वरूप आज गांव में सफाई कर्मी पहुंचे और सफाई कार्य शुरू किया। इस अवसर पर रामेश्वर दयाल ने सफाई कर्मियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह पहली बार है।जब गांव में सफाई कर्मी आये हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों में सफाई के नाम पर कोई भी काम नहीं हुआ था। रामेश्वर दयाल ने यह भी खुलासा किया कि सालभर में लगभग 10 लाख रुपये सफाई के लिए खर्च होते हैं, लेकिन गंदगी की स्थिति जस की तस बनी रहती है। उनका कहना था कि सफाई के नाम पर सरकारी फंड का दुरुपयोग किया जाता है और अधिकारी खानापूर्ति करते हैं।रामेश्वर दयाल ने आगे कहा कि स्वच्छ भारत मिशन, स्वच्छ भारत अभियान और अमृत काल जैसे कार्यक्रमों के बावजूद गांवों में गंदगी का यह हाल होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि सफाई के काम में इतनी धांधली हो रही है, तो अन्य सरकारी कार्यों की स्थिति क्या होगी? इस स्थिति में, जब सफाई की शिकायत तक राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को भेजनी पड़ी, तब जाकर यह कार्य शुरू हुआ। ग्रामवासियों ने सफाई कार्य की शुरुआत पर खुशी जताई और इसे एक सकारात्मक कदम माना, लेकिन यह भी कहा कि यह स्थिति असमंजस में डालने वाली है। कि सफाई जैसे बुनियादी कार्यों के लिए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को दखल देना पड़ा। रामेश्वर दयाल ने इस मुद्दे को उजागर करते हुए कहा कि ग्रामीण गंदगी और नारकीय स्थिति में जीवन बिता रहे हैं, जबकि बड़े पैमाने पर सरकारी फंड खर्च किए जाते हैं। अब देखना यह है, कि क्या अन्य गांवों में भी ऐसी ही सफाई कार्यों की शुरुआत होती है, और क्या संबंधित अधिकारी इस दिशा में ठोस कदम उठाते हैं।

