Thursday, February 26, 2026
Homeदेशकई बार मेरे दिल में ख्याल आया कि अगर मैं जिंदगी में...

कई बार मेरे दिल में ख्याल आया कि अगर मैं जिंदगी में असफल हो गया तो खुद को गोली मार लूंगा

मूकनायक

देश

“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”

बहुजनों के मसीहा, बहुजन नायक, क्रांतिकारी, महान तपॅस्वी,महान त्यागी और वैज्ञानिक से बने समाजिक वैज्ञानी मान्यवर साहिब श्री कांशीराम जी के त्याग और संघर्ष भरे जीवन की दास्तान हम आपके साथ साझा करते हैं।

“जिंदगी में कई बार मेरे मन में ख़्याल आया है कि अगर मैं अपने समाज की परेशानियों और ख्वाहिशों को लेकर सफल न हो सका तो मैं अपने-आप को गोली मार के खत्म कर लूँगा। लेकिन मैं अपने-आप को गोली भी तो नहीं मार सकता! अगर मैं ऐसा करता हूँ तो लोग समझेंगे कि पता नहीं कांशी राम में क्या कमी थी जो उसने आत्महत्या कर ली? फिर मैंने सोचा कि अपने-आप को दुखी करने के लिए अपने शरीर पर खुद ही कोड़े मारूँ। फिर मैंने सोचा कि अपने-आप को सजा भी दूँ और लोग देखें भी,और मेरे इस तरह खुद को सज्जा देने से कुछ सीखें भी। फिर मैंने 51 वर्ष की आयु में फिर से साइकिल चलाने का इरादा कर लिया।”

ये बातें कांशी राम जी ने 16 अगस्त 1985 को डाक पत्थर (उत्तराखंड में) जगह पर साइकिल यात्रा के दौरान कही। वे हरिद्वार से कंडी जा रहे थे। इस रैली का आयोजन भारतीय हैवी लिमिटेड (BHL) के कुछ कर्मचारियों ने किया था। इस रैली को 20-22 दिन में पूरे उत्तर प्रदेश की परिक्रमा करके अपने निर्धारित समय पर पहुँचना था।

यह ऐसा मुश्किल दौर था जब साहेब और बामसेफ के संबंधों में काफी खटास पैदा हो चुकी थी। साहेब के टूटे हुए मनोबल से निकले ऐसे शब्द उनकी मानसिक अवस्था को दर्शाते हैं।

साहेब ने अपने मन का गुबार निकालते हुए आगे कहा कि ये लोग (बामसेफ वाले) मेरी बात समझते क्यों नहीं हैं? बहुत से लोग अभी तक अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए व्यक्तिगत तौर पर काम कर रहे हैं। जबकि विचारधारा से उनका कोई लेना-देना नहीं है। ये लोग व्यक्तिगत तौर पर रुपये-पैसे को लेकर तो मजबूत हो सकते हैं लेकिन सैध्दांतिक तौर पर, आने वाली पीढ़ियों तक, कोरे पन्ने की तरह कोरे और अनपढ़ ही कहलाएँगे। ये लोग मिशन का काम नहीं करना चाहते क्योंकि मिशन के कामों में लाखों दुश्वारियाँ हैं। ये लोग चापलूसी करके या इधर-उधर की बातें करके आगे बढ़ना चाहते हैं। ये लोग क्यों नहीं समझते कि कोई किसी को आगे नहीं बढ़ा सकता। जिस तरह बाकी आगे बढ़ रहे हैं उसी तरह ये लोग भी आगे बढ़ जाएँगे, बशर्ते, मिशन के लिए मेहनत तो जारी रखें! कई लोग तो मेरे एक-दो कैडर कैंप सुनकर ही खुद को कांशी राम समझने की भूल कर बैठे हैं।

पशुवृति वाले लोग हमेशा ही बिकते हैं। अरबी घोड़ा बेशक करोड़ों में बिकता है लेकिन है तो वह पशु ही- साहेब कांशी राम।

प्रस्तुत करते है।
इंजीनियर तेजपाल सिंह
94177-94756

लेखक पुस्तक मैं कांशीराम बोलता हूं।
पम्मी लालो मजारा-95011-43755

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments