Thursday, February 26, 2026
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मानवीय अनुभूतियों से परिपूर्ण सम्यक मानव जीवन प्राप्ति का मार्ग : “परम ज्ञान सम्यक संबोधि”

मूकनायक

देश

” राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”

‌संविधान के संरक्षक और प्रचारक जिन्दाबाद!!!! ‌ ‌ दु:खविहीन, श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों , मानवीय अनुभूतियों से परिपूर्ण सम्यक मानव जीवन प्राप्ति का मार्ग, “परम‌ ज्ञान, सम्यक सम्बोधि” प्राप्त कर,अपना सम्पूर्ण जीवन ,बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय हेतु अर्पण करने वाले महामानव तथागत गौतमबुद्ध जी के 84000 व्याख्यानों के अलोकिक प्रकाश को, महान बौद्ध दायाद,असोक महान ने भित्तिचित्रों, शिलालेखों, स्तूपों में लिपि वृद्ध कर के आज के दिन ही ,सभी पर दीप प्रज्ज्वलित कर मानव जगत को समर्पित किया था । दीपमालिका एवं दीप दान पर्व की मंगल कामनाओं के साथ, बहु लोक जन समाज की सम्यक समृद्धि हेतु मूलभूत विचार-विमर्श———-“To pay give back to the society.” “समाज का समाज को अर्पण”। बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी ने पढ़े लिखे साथियों से कहा था कि आप अपनी कमाई का बीसवां भाग,अपने उस समाज के उत्थान हेतु प्रदान करें,जिस समाज से हम निकल कर आये हैं, जिससे आप का समाज विकसित होकर राष्ट्र की प्रमुख धारा में आ सके। ‌ पढ़ें लिखे ,बहुलोकजन समाज के साथियों ने बाबा साहब को धोका दिया। पढ़ लिख कर सरकारी नौकरी पा कर, निहायत व्यक्ति वादी सोच,स्वानता -सुखाय में फस कर व्यक्ति बांदी हो गये।मानव अकेले व्यक्तिगत जीवन यापन नहीं कर सकता है, समूह/समाज में रहना उसकी मजबूरी युक्त आवश्यकता है। ‌‌ ‌विडम्बना देखिए कि हम बिना समाज के जी नहीं सकते,ओर समाज को हम जिन्दा कर नहीं सकते, विकसित कर नहीं सकते , प्रगतिशील बना नहीं सकते , कैसे हमारा जीवन श्रेष्ठ होगा? ‌‌। ‌यथार्थ में बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी का संकल्प था कि भारत के शोषित,वंचित,‌‌‍‌ ‌अभाव ग्रस्त लोग भी एक उन्नत , सम्यक श्रेष्ठ मानवीय जीवन यापन करें। बाबा साहब का कहना था कि मानव को कल्याणंकारी श्रेष्ठ जीवन अकेले व्यक्तिगत जीवन शैली से नहीं प्राप्त होगा,उसे सामाजिक सोच के साथ सामाजिक/सामूहिक जीवन शैली अपनानी होगी। ‌ ‌ “‌जब समाज श्रेष्ठ कल्याण कारी होगा,तब ही उस समाज में रहने बाले मानव का जीवन श्रेष्ठ कल्यांणकारी होगा। समाज के कल्याणार्थ , समाज का प्रबंधक ,”राज”ओर समाज का नीति-निर्धारक,” धम्म ” को कल्याणंकारी श्रेष्ठ होना अतिआवश्यक है। इसे हम यों समझ सकते हैं कि —————-‌‍‌। सम्यक ‌‌कल्यांणकारी, श्रेष्ठ मानव जीवन – सम्यक कल्याणकारी,परस्पर निर्भर,पारिस्परिक सहयोगी सुव्यवस्थित मानव समाज, -समाज के प्रबन्धक,राज का परिष्कृत,बहु कल्याणाकारी स्वरूप “लोकतन्त्र”-तथा समाज का कल्याणकारी नीति निर्देशक तन्त्र , धम्म,इन सबको सम्यक श्रेष्ठ कल्यांणकारी होना चाहिए। इस सम्यक श्रेष्ठ कल्यांणकारी मानवीय जीवन के लिए हमें व्यक्तिगत जीवन यापन शैली को तिलांजलि देकर, मानवीय सम्यक,सहयोगिक, सामूहिक जीवन शैली अपनानी होगी। इन्हीं भावनाओं के मद्देनजर बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी ने To pay give back to the society की बात कही थी। किन्तु हमारे पढ़ें लिखे साथियों की उदासीनता ने यह साबित कर दिया कि वर्तमान में,बहुलोक जन समाज दान की प्रवृत्ति नहीं रखता है।हम जो हिन्दू धर्म के माध्यम से दान-दक्षिणा का स्वरूप देखते हैं ,वह निःस्वार्थ दान नहीं,वह भी एक सोदेवाजी है,हम तथाकथित हिन्दू कर्म काण्डों में दान नहीं करते हम दान -दक्षिणा के बदले में कुछ न कुछ मांगते हैं, दुश्मनों पर जीत, पुत्र ,यश,सुख , समृद्धि सम्मान न जाने ओर क्या-,क्या हमारी मांग , आकांक्षायें होती है। एसी सोच में निःस्वार्थ दान की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। यहां मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि हम समाज को, समाज की प्रगति हेतु,कुछ /अपनी कमाई का बीसवां भाग क्यों दें? क्योंकि हम समाज के बिना अकेले जी नहीं सकते हैं। “समाज के हित में व्यक्ति का हित निहित है।”। हममें देनें की प्रवृत्ति नहीं है, हां हम निवेश कर सकते हैं। महामानव बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के अनुयायी,नाती होने के नाते,मैं अब बहुलोक जन समाज के पढ़े लिखे साथियों से विनम्र निवेदन करना चाहूंगा कि,”pls.To invest to welfare of your society.” “समाज का समाज में निवेश करो” ‌हमारी सतत गुलामी का कारण अशिक्षा के साथ पूंजी विहीनता है। अधिकांश बहुजन समाज या तो पूंजी विहीन है,या अल्प पूंजीवान है। पूंजी के अभाव में हमें जीविकोपार्जन हेतु मजदूरी करना पड़ती है, मजदूर,मजे से दूर मजबूर व्यक्ति है। “विश्व का कोई भी पूंजीवादी व्यक्ति ,हम गरीबों को समृद्धशाली बनाने नहीं आयेगा, हमें ही स्वयं अपनी गरीबी, आपसी सहयोग से , मिलकर दूर करना पड़ेगी। यही बहुलोक जन समाज की आर्थिक गुलामी से मुक्ति का मार्ग है,बहुलोकजन समाज की समृद्धि का रास्ता है। ‌‌ “सामाजिक परिवर्तन ओर आर्थिक मुक्ति आन्दोलन “को तीब्र गतिशील करने हेतु बहुलोकजन समाज का स्वसंचालित , पूंजी निर्माण एवं पूंजी संवर्धनार्थ, व्यवसाय स्थापना ,अभियान का प्रथम सोपान——- “सामाजिक आर्थिक निवेश” ओर श्रमपूंजी सहयोग” दान नहीं, आर्थिक ओर श्रमजन्य पूंजी चाहिए है। ‌ सामाजिक आर्थिक निवेश क्या है?,श्रम पूंजी हिस्सेदारी क्या है? धरातल पर क्या प्रारूप होगा? कैसे पूंजी निर्माण ओर पूंजी संवर्धन होगा?इसका प्रारूप क्या होगा ?इन सभी प्रश्नों के उत्तरों का विवरण अगले अंक में ———– भवतुसब्बमंगलम्

लेखक: भागवत नारायण काछी

झांसी जिला ब्यूरो चीफ मूकनायक

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